July 28, 2026

मांगें पूरी होने तक नहीं लौटेंगे किसान भोपाल में पैदल मार्च के साथ सीएम हाउस घेराव की तैयारी सात दिन के राशन के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारी

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भोपाल  मध्यप्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसानों ने भोपाल की ओर कूच कर दिया। मंगलवार को राजधानी की सीमा पर मंडीदीप स्थित कलियासोत नदी के पुल के पास पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई थी लेकिन बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने उसे हटाते हुए भोपाल में प्रवेश कर लिया। इसके बाद किसानों का विशाल पैदल मार्च राजधानी की ओर बढ़ता गया और पूरे इलाके में जय जवान जय किसान के नारों से माहौल गूंज उठा।

आंदोलन में शामिल किसानों का कहना है कि वे केवल प्रदर्शन करने नहीं बल्कि अपनी मांगों को पूरा करवाने के इरादे से आए हैं। उनका लक्ष्य मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना है और जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन को लंबा खींचने की तैयारी के तहत किसान अपने साथ सात दिन का राशन पानी और जरूरी सामान भी लेकर पहुंचे हैं। कई किसान अपने ट्रैक्टर ट्रॉली में पहले से तैयार भोजन और दाल बाटी जैसी खाद्य सामग्री भी साथ लाए हैं ताकि आंदोलन के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि सरकार को कई बार ज्ञापन और बातचीत के माध्यम से किसानों की समस्याओं से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। किसानों का आरोप है कि मूंग की सरकारी खरीदी सीमित होने के कारण उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके अलावा खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों और अव्यवस्था के चलते समय पर खाद नहीं मिल रही जिससे खेती प्रभावित हो रही है।

भोपाल सीमा पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसानों को राजधानी में प्रवेश से रोका जा सके लेकिन किसानों के भारी दबाव के आगे बैरिकेडिंग टिक नहीं सकी। किसानों के प्रवेश के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है तथा राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

आंदोलन में शामिल किसान हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कह रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक फसल या एक जिले का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों की लड़ाई है। यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता तो राजधानी में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां भी प्रभावित होने की संभावना है।

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