शिवराज के सामने गूंजे अगले मुख्यमंत्री के नारे विजयवर्गीय का दर्द छलका प्रहलाद ने मांगी मुक्ति राजनीति में बढ़ी हलचल
सभा के दौरान शिवराज सिंह चौहान अपने पुराने अंदाज में जनता से संवाद कर रहे थे। जब एक समर्थक ने आई लव यू मामा कहा तो उन्होंने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया और लोगों का अभिवादन किया। इसी दौरान कुछ युवकों ने अगले मुख्यमंत्री मामा हैं के नारे लगाए। शिवराज ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए समर्थकों को ऐसा करने से रोक दिया। इसके बाद यह घटना राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गई और विभिन्न स्तरों पर इसके अलग-अलग मायने निकाले जाने लगे।
इधर प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान भी सुर्खियों में आ गया। इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि दोनों जिला अध्यक्षों का अच्छा समय चल रहा है और शायद उनके बीच बैठने से उनका भी अच्छा समय आ जाए। हालांकि यह बात उन्होंने हल्के अंदाज में कही लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे उनके हालिया बयानों और राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा। पिछले दिनों भी विजयवर्गीय ने अपनी उपेक्षा को लेकर पत्र लिखा था जिसकी काफी चर्चा हुई थी।
उधर मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का बयान भी लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना। दतिया उपचुनाव में टिकट वितरण को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें किसी पद का मोह नहीं है और यदि कभी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाए तो इसमें भी कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में व्यक्ति पद के लिए नहीं बल्कि संगठन और विचारधारा के लिए काम करता है। उनके इस बयान को भी राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
निवाड़ी में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा विधायक अनिल जैन ने शायराना अंदाज में मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए उन्हें जादूगर तक कह दिया। उन्होंने मंच से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील भी की। इसके बाद मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री की तुलना भगवान महाकाल से कर दी। उन्होंने कहा कि जैसे महाकाल भोले हैं वैसे ही मुख्यमंत्री भी सहज और सरल स्वभाव के हैं। इस बयान ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हुई।
इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि दतिया उपचुनाव के बाद पार्टी अपने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर नजर रख सकती है ताकि संगठन के भीतर अनुशासन और एकजुटता बनाए रखी जा सके। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों मंचों से दिए जा रहे बयान समर्थकों के नारे और नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने वाले समय की राजनीतिक दिशा को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रही हैं।
