July 28, 2026

अमेरिका-ईरान तनाव नरम पड़ते ही फिसले कच्चे तेल के दाम, एक हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

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वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों की कीमतें करीब एक सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ प्रस्तावित हवाई कार्रवाई फिलहाल टालने से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं कुछ कम हुई हैं।

सोमवार को ब्रेंट क्रूड 8.42 डॉलर यानी 8.7 फीसदी टूटकर 88.36 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 17 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं WTI क्रूड 6.70 डॉलर यानी 7.5 फीसदी गिरकर 82.61 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 16 जुलाई के बाद का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई फिलहाल रोकने के फैसले से बाजार में राहत का माहौल बना है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद भी मजबूत हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला।

ट्रंप ने कूटनीति को दी प्राथमिकता

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को और समय देने के उद्देश्य से सैन्य कार्रवाई स्थगित करने का फैसला किया है। ट्रंप ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

सऊदी और रूस से जुड़ी घटनाओं पर भी नजर

इस बीच सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने इराक की ओर से भेजे गए ड्रोन को मार गिराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के यनबू तेल निर्यात केंद्र से जुड़ी आपूर्ति लाइनों को निशाना बनाने का दावा किया है। दूसरी ओर, रूस के ब्लैक सी स्थित प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल पर ड्रोन हमलों से कजाकिस्तान के तेल उत्पादन पर भी असर पड़ा, हालांकि बाद में कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम ने टर्मिनल से तेल लोडिंग फिर शुरू होने की पुष्टि की।

बाजार में बनी रह सकती है अस्थिरता

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही फिलहाल तनाव कम होता दिखाई दे रहा हो, लेकिन जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल आपूर्ति की स्थिति आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।

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