July 27, 2026

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के परिणामों से उपजे तनाव के कारण छात्रा ने उठाया खौफनाक आत्मघाती कदम

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नई दिल्ली । चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता और मानसिक दबाव का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश की राजधानी में बीते एक महीने से चल रहा विरोध प्रदर्शन और अनशन भले ही सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद समाप्त हो गया हो, लेकिन परीक्षा के नतीजों और प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उपजा मानसिक तनाव अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। इस बीच महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के कर्जत तालुका से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां मेडिकल की पढ़ाई का सपना देख रही उन्नीस वर्षीय छात्रा ने परीक्षा में कम अंक आने से निराश होकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

घटना के संदर्भ में मिली जानकारी के अनुसार, उक्त छात्रा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के नतीजों को लेकर पिछले कुछ समय से अत्यधिक मानसिक दबाव का सामना कर रही थी। शनिवार को जब परिवार के सदस्य किसी कार्यवश घर से बाहर गए हुए थे, तब छात्रा ने घर पर अकेले रहते हुए यह अतिवादी कदम उठाया। जब परिजन वापस लौटे, तो उन्होंने स्थिति देखकर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस दल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि छात्रा ने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाई थी, लेकिन घोषित नतीजों में उसे बेहद कम अंक प्राप्त हुए। डॉक्टर बनने के अपने सपने के टूटने और भविष्य की अनिश्चितता के डर से वह गहरे अवसाद में चली गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रहे हैं और परिजनों व आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटे हैं।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तर की इस प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और पुनरीक्षा से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण देशभर में लाखों छात्र और उनके अभिभावक भारी मानसिक दबाव से गुजर रहे थे। परीक्षा प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों द्वारा तनाव में आकर ऐसे खौफनाक कदम उठाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। छात्र संगठनों और शिक्षाविदों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों द्वारा पिछले एक महीने से लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इस आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, गड़बड़ियों की उच्च स्तरीय जांच और छात्रों के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग उठाई थी। सरकार की ओर से उच्च स्तरीय समिति के गठन और सुधार संबंधी आश्वासन मिलने के बाद यह धरना-प्रदर्शन समाप्त किया गया था, लेकिन इस प्रशासनिक घटनाक्रम के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा का मुद्दा अब भी गंभीर बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का अत्यधिक दबाव और असफलता का डर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों और समाज को एक साथ मिलकर युवाओं को यह समझाने की आवश्यकता है कि कोई भी परीक्षा जीवन का अंतिम विकल्प नहीं होती। प्रशासनिक स्तर पर परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के लिए नियमित परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली स्थापित करना बेहद जरूरी हो गया है ताकि इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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