लड्डू गोपाल को क्या हर दिन चाहिए माखन मिश्री जानें कौन सा भोग है प्रिय और क्या कहते हैं शास्त्रीय नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों के प्रेम और सच्ची भावना के भूखे हैं न कि केवल किसी विशेष भोग के। यदि किसी कारणवश प्रतिदिन माखन मिश्री अर्पित करना संभव न हो तो इससे भगवान नाराज नहीं होते। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो भी भोग अर्पित किया जाए वह पूरी श्रद्धा पवित्रता और प्रेम के साथ समर्पित किया जाए। भगवान के लिए भाव सबसे बड़ा होता है।
यदि माखन मिश्री उपलब्ध न हो तो लड्डू गोपाल को मिश्री दूध दही ताजे मौसमी फल धनिया पंजीरी मखाने की खीर रबड़ी मालपुआ या घर में बना सात्विक भोजन भी भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है। केले आम खरबूजा जैसे मौसमी फल और केसर युक्त गुनगुना दूध भी भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं।
भोग अर्पित करते समय कुछ धार्मिक नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है। भगवान को जो भी प्रसाद अर्पित करें उसमें तुलसी दल या तुलसी का पत्ता अवश्य रखें क्योंकि बिना तुलसी के श्रीकृष्ण का भोग पूर्ण नहीं माना जाता। जिस प्रकार घर के छोटे बच्चे को समय पर भोजन कराया जाता है उसी भावना से लड्डू गोपाल को भी सुबह दोपहर शाम और रात्रि का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
भोग बनाते समय रसोई की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए और उसमें लहसुन प्याज या तामसिक पदार्थों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। भोग अर्पित करने के बाद उसे कुछ समय तक भगवान के सामने रखा रहने दें और साथ में स्वच्छ जल का पात्र भी अवश्य रखें। इसके बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में श्रद्धापूर्वक बांट देना चाहिए।
धार्मिक दृष्टि से भगवान श्रीकृष्ण भक्तों के निष्कपट प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होते हैं। इसलिए यदि किसी दिन माखन मिश्री उपलब्ध न हो तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सच्चे मन से अर्पित किया गया सात्विक भोग और भक्तिभाव ही भगवान को सबसे अधिक प्रिय माना गया है।
