31 जुलाई से पहले ITR फाइल करते समय न भूलें ये जरूरी टैक्स छूट, सही क्लेम से बच सकते हैं हजारों रुपये
पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले प्रावधानों में धारा 80C प्रमुख है। इसके अंतर्गत पीपीएफ, ईपीएफ, ईएलएसएस, टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट, राष्ट्रीय बचत पत्र, सुकन्या समृद्धि योजना, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस और होम लोन की मूल राशि के भुगतान जैसी योग्य निवेश एवं खर्च पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट प्राप्त की जा सकती है। यदि किसी करदाता ने इन योजनाओं में निवेश किया है, तो रिटर्न दाखिल करते समय उसका सही दावा करना आवश्यक है।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस में निवेश करने वाले करदाताओं को भी अतिरिक्त लाभ मिलता है। धारा 80CCD(1B) के अंतर्गत 80C की सीमा से अलग 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कटौती उपलब्ध है। कई करदाता इस अलग प्रावधान का लाभ लेना भूल जाते हैं, जबकि इससे कुल टैक्स देनदारी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
स्वास्थ्य बीमा पर चुकाया गया प्रीमियम भी टैक्स बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। धारा 80D के तहत स्वयं, जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के लिए खरीदे गए स्वास्थ्य बीमा पर निर्धारित सीमा तक कर छूट का दावा किया जा सकता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा अधिक निर्धारित की गई है, जिससे परिवार के स्वास्थ्य सुरक्षा खर्च पर भी कर राहत मिलती है।
जिन लोगों ने घर खरीदने के लिए होम लोन लिया है, वे धारा 24(b) के अंतर्गत होम लोन के ब्याज पर दो लाख रुपये तक की टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं। वहीं लोन की मूल राशि के भुगतान का लाभ अलग से धारा 80C के अंतर्गत लिया जा सकता है। इस प्रकार दोनों प्रावधानों का सही उपयोग कर टैक्स बचत को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
उच्च शिक्षा के लिए लिए गए एजुकेशन लोन पर भी कर राहत उपलब्ध है। धारा 80E के तहत शिक्षा ऋण पर चुकाए गए ब्याज की पूरी राशि पर कटौती का दावा किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थाओं, ट्रस्टों या राहत कोष में किए गए दान पर धारा 80G के अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत या 100 प्रतिशत तक टैक्स छूट मिल सकती है। इसके लिए संबंधित रसीद और आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी होता है।
आईटीआर दाखिल करने से पहले सभी वित्तीय विवरणों का मिलान करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। करदाताओं को फॉर्म-16, वार्षिक सूचना विवरण और फॉर्म 26एएस में दर्ज जानकारी की जांच करनी चाहिए ताकि आय और कर कटौती से संबंधित कोई अंतर न रहे। साथ ही सभी निवेश प्रमाण, बीमा प्रीमियम की रसीदें और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखें। पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था की तुलना कर वही विकल्प चुनें, जिससे अधिक कर लाभ मिले। बैंक खाते की जानकारी सावधानीपूर्वक भरने के बाद रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन समय पर पूरा करना भी आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना आयकर रिटर्न की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है और रिफंड में भी देरी हो सकती है।
