बॉलीवुड में ग्लैमर का ट्रेंड सेट करने वाली हेलेन का खुलासा, गानों को खास बनाने पेरिस-लंदन से लाती थीं एक्सेसरीज
अपनी डांस पोशाकों और लुक के पीछे की मेहनत का जिक्र करते हुए हेलेन ने कहा कि वे हमेशा अपने किरदारों में नयापन और विशिष्टता चाहती थीं। उन्होंने बताया कि वे लंदन से खास पलकें (आईलैशेज) और हरे-नीले रंग के आई लेंस खरीदकर लाती थीं। इसके अलावा, अपने गानों की पहचान बने सिर पर पहने जाने वाले हेडगियर्स वे अपनी हेयर ड्रेसर से तैयार करवाती थीं। अपनी कॉस्ट्यूम्स में इस्तेमाल होने वाले असली पंख (फैदर्स) लेने के लिए वे विशेष रूप से पेरिस गई थीं। बड़ी-बड़ी ज्वैलरी, सनग्लासेज और अनोखी एक्सेसरीज वे खुद चुनती थीं ताकि उनका लुक स्क्रीन पर सबसे अलग नजर आए।
1951 में फिल्म ‘आवारा’ से बतौर बैकग्राउंड डांसर अपने करियर की शुरुआत करने वाली हेलेन को 1954 की फिल्म ‘अलिफ लैला’ में पहला सोलो ब्रेक मिला था। इसके बाद उन्होंने ‘कारवां’ का ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘शोले’ का ‘महबूबा महबूबा’, ‘डॉन’ का ‘ये मेरा दिल’, ‘तीसरी मंजिल’ का ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ और ‘अनामिका’ का ‘आज की रात कोई आने को है’ जैसे दर्जनों सदाबहार और आइकॉनिक गाने दिए। उनके इन गानों में उनकी अनोखी व ग्लैमरस कॉस्ट्यूम्स ने गानों की लोकप्रियता में अहम भूमिका निभाई और हिंदी सिनेमा में ग्लैमर के मायने बदल दिए।
कार्यक्रम के दौरान शो के जज जावेद जाफरी और अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने हेलेन के बॉलीवुड में योगदान की जमकर सराहना की। जावेद जाफरी ने कहा कि हेलेन के बोल्ड और एलिगेंट अंदाज ने उस दौर में स्क्रीन प्रेजेंस और फैशन के नए ट्रेंड सेट किए थे। वहीं करिश्मा कपूर ने अपनी मां के हवाले से बताया कि सेट पर हेलेन का दर्जा इतना ऊंचा था कि उनके आते ही हर कोई सम्मान में शांत हो जाता था। उनके अभिनय, स्टाइल और अनुशासन ने उन्हें भारतीय सिनेमा में एक सदाबहार डांसर और अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया।
