July 26, 2026

IVF को लेकर मन में हैं सवाल? जानें कब पड़ती है जरूरत, कितनी है सफलता और क्या हैं सच-झूठ

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नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, देर से शादी, पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, मोटापा और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याओं के कारण इनफर्टिलिटी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी IVF लाखों दंपतियों के लिए माता-पिता बनने का एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आया है। हालांकि IVF जितना लोकप्रिय हुआ है, उससे जुड़े भ्रम और मिथक भी उतनी ही तेजी से फैले हैं। कई लोग मानते हैं कि IVF से पैदा होने वाले बच्चे कमजोर होते हैं या यह प्रक्रिया हर बार सफल हो जाती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन धारणाओं का वैज्ञानिक आधार नहीं है।

IVF एक आधुनिक प्रजनन तकनीक है जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है, जहां आगे की गर्भावस्था सामान्य तरीके से ही विकसित होती है।

सबसे बड़ा मिथक यह है कि IVF कराने के बाद गर्भधारण तय होता है। जबकि वास्तविकता यह है कि इसकी सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है। महिला की उम्र, अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता, भ्रूण की स्थिति, गर्भाशय का स्वास्थ्य और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियां सफलता की संभावना तय करती हैं। कई मामलों में पहली कोशिश सफल नहीं होती और दूसरी या तीसरी बार सफलता मिलती है।

एक और आम धारणा यह है कि IVF से पैदा होने वाले बच्चे शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हैं। उनका कहना है कि IVF में केवल निषेचन की प्रक्रिया प्रयोगशाला में होती है। इसके बाद भ्रूण का विकास गर्भाशय में बिल्कुल उसी तरह होता है, जैसा प्राकृतिक गर्भधारण में होता है। वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि अधिकांश IVF से जन्मे बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होते हैं और उनका शारीरिक तथा मानसिक विकास सामान्य बच्चों की तरह ही होता है। बच्चे का स्वास्थ्य माता-पिता की आनुवंशिक स्थिति, गर्भावस्था के दौरान मां के पोषण, जीवनशैली, संक्रमण और प्रसव की परिस्थितियों पर अधिक निर्भर करता है।

कई लोगों को लगता है कि IVF से हमेशा जुड़वां या तीन बच्चे पैदा होते हैं। पहले सफलता की संभावना बढ़ाने के लिए एक से अधिक भ्रूण गर्भाशय में स्थापित किए जाते थे, इसलिए मल्टीपल प्रेग्नेंसी की संभावना अधिक रहती थी। लेकिन आधुनिक तकनीकों में डॉक्टर अधिकतर मामलों में केवल एक स्वस्थ भ्रूण ही प्रत्यारोपित करते हैं। इससे जुड़वां गर्भावस्था की संभावना कम होती है और मां तथा बच्चे दोनों के लिए जोखिम भी घट जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि IVF उन दंपतियों के लिए एक प्रभावी विकल्प है जिन्हें लंबे समय तक प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण नहीं हो पा रहा हो। हालांकि इस प्रक्रिया को अपनाने से पहले किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से पूरी जांच और सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर उपचार, स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक मानसिक स्थिति IVF की सफलता की संभावना को बेहतर बना सकती है।

आज की आधुनिक चिकित्सा ने लाखों परिवारों की जिंदगी में खुशियां लौटाई हैं। इसलिए IVF को लेकर फैली अफवाहों और मिथकों पर भरोसा करने के बजाय सही और वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर निर्णय लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

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