NEET विवाद पर दीया मिर्जा ने उठाए सवाल, प्रधानमंत्री के बयान में छात्रों के दर्द और परिवारों की पीड़ा का जिक्र न होने पर जताई नाराजगी
दीया मिर्जा ने अपनी पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन में उन परिवारों के लिए पर्याप्त सहानुभूति दिखाई नहीं दी, जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों और उनके समर्थन में आवाज उठाने वाले लोगों की भावनाओं का भी उल्लेख होना चाहिए था। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ मानवीय संवेदना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
अभिनेत्री ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार की ओर से प्रतिक्रिया आने में काफी समय लगा। उनका कहना था कि इतने दिनों बाद जारी संदेश में ऐसी बातें अपेक्षित थीं, जो छात्रों और अभिभावकों के मन में पैदा हुई चिंता और निराशा को कुछ हद तक कम कर सकें। उन्होंने इस मुद्दे को केवल परीक्षा प्रणाली का संकट नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और विश्वास से जुड़ा विषय बताया।
दीया मिर्जा की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। इस तरह सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के विचार सामने आए।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने वीडियो संदेश में कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस तरह के मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़े कानूनी प्रावधानों की दिशा में कदम उठाने की भी जानकारी दी थी।
इसी बीच शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अपने अनशन को समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि विभिन्न पक्षों के साथ बातचीत और व्यापक अपील के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। उनके अनशन की समाप्ति के बावजूद परीक्षा सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और छात्रों के हितों की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, समयबद्ध जांच, कठोर कानूनी कार्रवाई और छात्रों का विश्वास बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती होगी। वहीं सार्वजनिक जीवन से जुड़े विभिन्न व्यक्तियों की प्रतिक्रियाएं यह भी दर्शाती हैं कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं।
