पेपर लीक पर सरकार की बड़ी तैयारी, 10 साल तक जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माने वाला संशोधन प्रस्ताव आज कैबिनेट में संभव
प्रस्तावित संशोधनों के तहत मौजूदा दंड प्रावधानों को और कठोर बनाने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान कानून में व्यक्तिगत मामलों में तीन से पांच वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। संशोधन के बाद गंभीर मामलों में सजा बढ़ाकर 10 वर्ष तक करने और जुर्माने की राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि कड़े दंड से ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सूत्रों के मुताबिक, संगठित अपराध के मामलों में पांच से दस वर्ष तक की सजा और न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा परीक्षा संचालन से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर या अन्य एजेंसियों की भूमिका यदि किसी अनियमितता में पाई जाती है तो उन पर भी एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे परीक्षा प्रक्रिया में शामिल सभी संस्थाओं की जवाबदेही तय करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को भी कानून का हिस्सा बनाने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार ऐसे मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में प्राथमिकता के आधार पर की जा सकेगी और उन्हें अधिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचते हुए दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना और भविष्य में होने वाले अपराधों के प्रति कड़ा संदेश देना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में छात्रों के नाम जारी अपने संदेश में स्पष्ट कहा था कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक हर कदम उठाएगी। इसी क्रम में कानून को और प्रभावी बनाने की दिशा में यह संशोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और विश्वास को प्रभावित किया है। इसके चलते परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग लगातार उठती रही है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य केवल दोषियों को कड़ी सजा देना ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना भी है। यदि मंत्रिमंडल इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो इसे परीक्षा सुधार और नकल माफिया पर कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
