भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 3-4 महीने में साइनिंग की उम्मीद, जाने क्यों अटका समझौता?
आखिर देरी क्यों हो रही है?
मनीला में आयोजित आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की शर्तें अंतिम रूप ले चुकी हैं। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर फिलहाल अमेरिका में चल रही सेक्शन 301 (Section 301) ट्रेड जांच के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।
अधिकारी के मुताबिक, भारत सहित करीब 60 देशों से जुड़े मामलों की जांच इस प्रावधान के तहत चल रही है, जिसके नतीजे अगले दो से तीन सप्ताह में आने की संभावना है। जांच पूरी होने के बाद अमेरिका भारत समेत अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
क्या है सेक्शन 301?
अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 के तहत सेक्शन 301 अमेरिका को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सके। यदि जांच में अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव या अनुचित व्यापारिक व्यवहार पाया जाता है तो अमेरिका उस देश पर व्यापारिक प्रतिबंध, अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) या अन्य कार्रवाई कर सकता है।
हाल के दिनों में अमेरिका ने इसी प्रावधान के तहत ब्राजील और कनाडा पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ व्यापारिक वार्ता में भी इस प्रावधान का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं।
टैरिफ भी बना बड़ी चुनौती
भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता के दौरान टैरिफ का मुद्दा भी प्रमुख बाधाओं में शामिल रहा है। अमेरिका पहले ही कई देशों पर 12.5 प्रतिशत तक नए टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दे चुका है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर भी चरणबद्ध तरीके से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की योजना की घोषणा की है। प्रस्ताव के अनुसार पहले दो वर्षों तक टैरिफ में राहत, उसके बाद एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक शुल्क लागू किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका सेक्शन 301 और टैरिफ नीति के जरिए अपनी शर्तों के अनुरूप समझौता करना चाहता है। वहीं भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह केवल ऐसे व्यापारिक समझौतों को स्वीकार करेगा, जो उसके राष्ट्रीय और आर्थिक हितों के अनुरूप हों।
