बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का सिंगर ने लगाया आरोप, कहा- देश की शिक्षा व्यवस्था और भविष्य को लेकर चिंतित होना हर नागरिक का अधिकार
अनुराधा पौडवाल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की शुरुआत देश की जनता, अपने प्रशंसकों, मित्रों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने लिखा कि एक सार्वजनिक हस्ती होने के नाते वह समाज में अपने प्रभाव और जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी राष्ट्र और व्यक्ति के समग्र विकास तथा सुनहरे भविष्य की असली नींव सिर्फ और सिर्फ मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही होती है। वह हमेशा से देश में बेहतर शिक्षा और साक्षरता की पक्षधर रही हैं और भविष्य में भी इस विचार पर पूरी दृढ़ता से कायम रहेंगी।
विवाद के मुख्य बिंदु पर स्पष्टीकरण देते हुए सिंगर ने उन हालिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया जिनमें देश भर में 94,000 से अधिक सरकारी या प्राथमिक स्कूलों के बंद होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि हर दिन औसतन 24 स्कूलों का बंद होना एक भारतीय नागरिक के तौर पर उनके लिए बेहद चौंकाने वाला और गंभीर रूप से चिंताजनक था। इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या में श्री राम लल्ला मंदिर परिसर में हुई कथित चोरी की घटना पर भी गहरा दुख और व्यक्तिगत पीड़ा व्यक्त की थी। उनके अनुसार, देश के सांस्कृतिक और शैक्षणिक प्रतीकों के साथ जुड़ी ऐसी खबरें किसी भी संवेदनशील नागरिक को आहत कर सकती हैं।
गायिका ने अपने पत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों की वकालत करते हुए लिखा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है, जहां प्रत्येक नागरिक को देश के हित में सम्मानपूर्वक अपनी राय रखने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। रचनात्मक संवाद और अलग-अलग दृष्टिकोण ही हमारे समाज और लोकतंत्र को आंतरिक रूप से मजबूत बनाते हैं। उन्होंने देश के वर्तमान नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अपना पूर्ण सम्मान व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या राजनीतिक एजेंडा चलाना बिल्कुल नहीं था।
पोस्ट के अंतिम हिस्से में अनुराधा पौडवाल ने कुछ डिजिटल क्रिएटर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपना तीव्र असंतोष और निराशा जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में कही गई उनकी बातों को कुछ तत्वों द्वारा जानबूझकर आधा-अधूरा काटा गया और वीडियो को गुमराह करने वाले संदर्भों के साथ इंटरनेट पर प्रसारित कर सनसनी फैलाने की कोशिश की गई। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे ऐसे संकीर्ण सोच वाले और सिर्फ व्यूज के लिए बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को बढ़ावा न दें।
