July 16, 2026

पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

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मध्य प्रदेश:के सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील अंतर्गत ग्राम भुईधरवा में वन विभाग की कार्रवाई के बाद भूमि अधिकार और बेदखली को लेकर नया विवाद सामने आया है। वन विभाग द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के आशियाने प्रभावित हुए, जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से संबंधित भूमि पर निवास और खेती करते आ रहे हैं तथा अब अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों का दावा है कि उनके परिवार वर्ष 1969 से इस भूमि पर रह रहे हैं और पीढ़ियों से खेती-बाड़ी कर जीवनयापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन को अब वन विभाग अतिक्रमित बता रहा है, उसी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के तहत प्रधानमंत्री आवास बनाए गए, हैंडपंप स्थापित किए गए और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों के अनुसार इन परिस्थितियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनका निवास और खेती वैध प्रक्रिया के दायरे में है।

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग के एक बीट गार्ड पर पट्टा दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। आरोप है कि एक ग्रामीण से नकद राशि और एक बकरा कथित रूप से लिए गए, लेकिन इसके बावजूद भूमि का पट्टा नहीं मिला। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि ग्रामीणों ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विभाग की ओर से आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

प्रभावित परिवारों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है और बेदखली की कार्रवाई के बाद उनके सामने रोजगार और आवास दोनों का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे चितरंगी तहसील कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग केवल स्थायी समाधान और भूमि अधिकार से जुड़े मामलों के निष्पक्ष निपटारे की है।

विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के लिए राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। जांच पूरी होने तक संबंधित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाने का निर्णय लिया गया है ताकि सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति वास्तव में भूमिहीन पाया जाता है और पात्रता की शर्तें पूरी करता है तो नियमानुसार उसे भूमि से संबंधित लाभ दिलाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिन परिवारों के मकान कार्रवाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही बरसात के मौसम को देखते हुए प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रहने और भोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर कराने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ, वन भूमि पर निवास, प्रशासनिक कार्रवाई और कथित भ्रष्टाचार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों के दावों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति के अधिकार प्रभावित न हों और कानून के अनुरूप उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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