July 15, 2026

टीएमसी में बगावत गहराई, बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा बोले- ममता बनर्जी के प्रति सम्मान कायम, लेकिन पार्टी की दिशा पर उठाए गंभीर सवाल

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नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी उठापटक के बीच वरिष्ठ नेता और विधायक मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने से राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। बागी खेमे में जाने के बाद मदन मित्रा ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता बनर्जी के प्रति उनका सम्मान पहले की तरह कायम है, लेकिन पार्टी की वर्तमान स्थिति और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर उनके मन में गंभीर असहमति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने संगठन से जुड़े सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, हालांकि विधायक के रूप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेंगे।

मदन मित्रा ने कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए हमेशा सम्माननीय नेता रही हैं और उनका स्थान उनके दिल में है। इसके बावजूद उन्होंने दावा किया कि पार्टी की वर्तमान परिस्थितियों ने उन्हें अलग रास्ता चुनने के लिए मजबूर किया। उनका कहना था कि संगठन के भीतर कई नेताओं ने समय रहते पार्टी को संभालने और आंतरिक मतभेद दूर करने के सुझाव दिए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने अपने बयान में पार्टी नेतृत्व के कुछ फैसलों पर भी सवाल उठाए। मदन मित्रा का आरोप था कि संगठन के भीतर संवाद की कमी और निर्णय प्रक्रिया में असंतुलन के कारण पार्टी लगातार कमजोर होती गई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सभी नेताओं को साथ लेकर निर्णय लिए जाते तो मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था। उनके अनुसार, व्यक्तिगत नेतृत्व को प्राथमिकता दिए जाने से संगठनात्मक ढांचा प्रभावित हुआ।

बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा ने कहा कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े सभी संगठनात्मक दायित्वों को छोड़ दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक बने रहेंगे। उनका कहना था कि संगठनात्मक पदों से हटने का फैसला सोच-समझकर लिया गया है और इसका उद्देश्य अपनी राजनीतिक सोच के अनुरूप आगे की भूमिका तय करना है।

उन्होंने ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि राजनीति को लंबी दौड़ की तरह देखा जाना चाहिए, जहां समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में राजनीतिक घटनाक्रम नई दिशा ले सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और राजनीतिक शिष्टाचार बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है।

पश्चिम बंगाल में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के अलग रुख अपनाने से राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि इन घटनाक्रमों पर पार्टी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

मदन मित्रा के इस फैसले और उनके बयानों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इन घटनाक्रमों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और आगे संगठनात्मक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।

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