भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सीईटीए और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट मिलकर भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच भरोसे पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाएंगे। उनके अनुसार इन समझौतों का उद्देश्य साझा विकास की सोच को वास्तविक परिणामों में बदलना है। इससे व्यापारिक सहयोग के साथ-साथ निवेश, अनुसंधान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक विस्तार देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों की यह साझेदारी भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है और इससे आर्थिक सहयोग का दायरा लगातार बढ़ेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए इस समझौते को लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को यूनाइटेड किंगडम के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से निर्यात में वृद्धि होगी और घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा। उनका मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल को भी नई दिशा देगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीकी सहयोग और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी। भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं और अन्य पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के लागू होने से सीमित अवधि के लिए यूनाइटेड किंगडम में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को विशेष लाभ मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते को भारत-यूके संबंधों का मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि सीईटीए के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को यूनाइटेड किंगडम में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी। उनके अनुसार कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्रोसेस्ड फूड सहित अनेक क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही एमएसएमई, किसानों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमों के लिए भी नए निर्यात अवसर तैयार होंगे।
सरकार का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान, नवाचार, कौशल विकास और पेशेवर सेवाओं में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी साझा समृद्धि, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक सहयोग के नए मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
