July 14, 2026

भारत के बीएफएसआई सेक्टर में निवेश को मिली नई रफ्तार, दूसरी तिमाही में डील वैल्यू 58 प्रतिशत बढ़कर 3.2 अरब डॉलर पहुंची

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नई दिल्ली ।भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र में वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। इस अवधि में कुल 65 डील्स दर्ज की गईं, जिनकी संयुक्त वैल्यू 3.2 अरब डॉलर रही। तिमाही आधार पर यह मूल्य लगभग 58 प्रतिशत अधिक रहा, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास और रणनीतिक सौदों की सक्रियता को दर्शाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय वित्तीय सेवाओं का बाजार निवेश आकर्षित करने में सक्षम बना हुआ है।

तिमाही समीक्षा के अनुसार इस अवधि में बीएफएसआई सेक्टर की हिस्सेदारी कुल डील वॉल्यूम का लगभग 11 प्रतिशत और कुल डील वैल्यू का 8 प्रतिशत रही। डील वैल्यू में आई उल्लेखनीय वृद्धि के पीछे एक बड़े रणनीतिक ट्रांजैक्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सौदों ने पूरे सेक्टर की निवेश क्षमता को मजबूती दी और बाजार में सकारात्मक संकेत भेजे।

अप्रैल से जून 2026 के बीच विलय एवं अधिग्रहण यानी एमएंडए गतिविधियों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान 24 एमएंडए डील्स हुईं, जिनकी कुल वैल्यू 1.5 अरब डॉलर रही। तिमाही आधार पर एमएंडए डील्स की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि उनकी वैल्यू करीब पांच गुना बढ़ गई। इससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय संस्थानों और निवेशकों ने विस्तार तथा रणनीतिक साझेदारियों पर अधिक ध्यान दिया।

रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक बाजार की गतिविधियों को अलग रखने पर बीएफएसआई क्षेत्र में 62 एमएंडए तथा प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल से जुड़े लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 2.8 अरब डॉलर रही। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण निवेश वातावरण पूरी तरह स्थिर नहीं माना जा रहा है। इसके बावजूद भारतीय वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बनी रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों ने इस दौरान विशेष रूप से स्केलेबल, तकनीक आधारित और नियामकीय रूप से मजबूत कारोबारों को प्राथमिकता दी। पूंजी निवेश का रुख पहले की तुलना में अधिक संतुलित और सोच-समझकर किया गया। यही कारण रहा कि सीमित निवेश माहौल के बावजूद रणनीतिक डील्स ने पूरे सेक्टर के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

समीक्षा अवधि के दौरान प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों में 38 सौदे दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 1.3 अरब डॉलर रही। दूसरी ओर, सार्वजनिक बाजार की गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी रहीं। इस दौरान एक प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के माध्यम से 97 मिलियन डॉलर जुटाए गए, जबकि दो क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए 310 मिलियन डॉलर की पूंजी हासिल की गई। इससे संकेत मिलता है कि निजी निवेश फिलहाल सार्वजनिक पूंजी बाजार की तुलना में अधिक सक्रिय बना हुआ है।

सेगमेंट के स्तर पर फिनटेक सबसे अधिक सक्रिय क्षेत्र रहा, जहां 31 डील्स के माध्यम से 1.4 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। वहीं वित्तीय सेवाओं और एसेट मैनेजमेंट क्षेत्र में 16 सौदों के जरिए 690 मिलियन डॉलर की डील वैल्यू सामने आई, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां स्थिर होने और पूंजी बाजार में सुधार आने के साथ भारत का बीएफएसआई इकोसिस्टम आने वाले समय में भी घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।

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