भारत में डेटा सेंटर सेक्टर बनेगा रोजगार का नया इंजन, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की मांग का अनुमान, एआई और क्लाउड टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी अवसरों की रफ्तार
रिपोर्ट के अनुसार भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता वर्तमान लगभग 1.5 गीगावाट से बढ़कर दशक के अंत तक करीब 6.5 गीगावाट तक पहुंचने की संभावना है। इसी के साथ देश का डेटा सेंटर बाजार 22 अरब डॉलर से अधिक का आकार प्राप्त कर सकता है। बढ़ती डिजिटल सेवाओं, ई-कॉमर्स, वित्तीय तकनीकों, सरकारी डिजिटल परियोजनाओं और एआई आधारित अनुप्रयोगों ने डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की जरूरतों को पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डेटा सेंटर क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रहे निवेश के कारण यह उद्योग देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में शामिल हो गया है। नई परियोजनाओं के शुरू होने से निर्माण, संचालन, रखरखाव और तकनीकी प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि शिक्षा संस्थानों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय नहीं हुआ तो भविष्य में कुशल पेशेवरों की कमी इस क्षेत्र की प्रगति में बड़ी चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम और व्यावहारिक कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल तकनीकी निवेश नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के लिए दीर्घकालिक रोजगार और कौशल विकास का बड़ा अवसर है। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, डेवऑप्स, एमएलऑप्स और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसी आधुनिक तकनीकी भूमिकाएं भी तेजी से उभर रही हैं।
अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर उद्योग में काम करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और आधुनिक कंप्यूटिंग प्रणालियों की समझ आवश्यक कौशल के रूप में विकसित होगी। इससे तकनीकी शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बढ़ेगी।
रिपोर्ट के अनुसार भविष्य के डेटा सेंटर केवल डिजिटल स्टोरेज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन, उन्नत कूलिंग सिस्टम और अत्याधुनिक तकनीकी अवसंरचना पर आधारित होंगे। इसी कारण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज इंजीनियर और पावर सिस्टम विशेषज्ञ जैसे नए पदों की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत समय रहते कुशल कार्यबल तैयार करने में सफल रहता है, तो डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार परिदृश्य दोनों को नई मजबूती प्रदान करेगा।
