July 14, 2026

टाटा कैपिटल की गोल्ड लोन बिजनेस में धमाकेदार एंट्री…. ₹318 करोड़ की डील की तैयारी!

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नई दिल्ली।
देश की दिग्गज गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) टाटा कैपिटल (Tata Capital) ने तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बिजनेस (Gold Loan Business) में धमाकेदार एंट्री कर ली है। कंपनी ने केरल की गोल्ड लोन कंपनी योगलोन्स (Yogakshemam Loans) में 88.6% हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया है। इस डील की कुल कीमत 318 करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसके साथ ही टाटा कैपिटल (Tata Capital) ने कंपनी के विस्तार के लिए करीब 93 करोड़ रुपये का नया निवेश भी करने का फैसला किया है। इस अधिग्रहण के बाद योगलोन्स, टाटा कैपिटल की सहायक (Subsidiary) कंपनी बन जाएगी।

यह डील ऐसे समय में हुआ है, जब भारत में गोल्ड लोन की मांग लगातार बढ़ रही है। बढ़ती महंगाई, आसान लोन प्रक्रिया और सोने की ऊंची कीमतों के कारण लोग तेजी से गोल्ड लोन का विकल्प अपना रहे हैं। ऐसे में टाटा कैपिटल (Tata Capital) का यह कदम उसके रिटेल लोन कारोबार को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।


योगलोंस कौन है और क्यों है खास?

योगलोंस (Yogloans) दक्षिण भारत की एक तेजी से बढ़ती गोल्ड लोन NBFC है। कंपनी के 162 ब्रांच केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में फैले हुए हैं। 31 मार्च तक कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब 708 करोड़ रुपये था और यह लगभग 32,000 ग्राहकों को सेवाएं दे रही थी।

इस कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसका अनुभवी प्रबंधन है। योगलोंस (Yogloans) के प्रमोटर उन्नीकृष्णन इडिचारम वीटिल पहले मनप्पुरम फाइनेंस (Manappuram Finance) के डिप्टी CEO रह चुके हैं। टाटा कैपिटल (Tata Capital) ने साफ किया है कि अधिग्रहण के बाद भी वही कंपनी का नेतृत्व करते रहेंगे, जिससे ग्राहकों और कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।


टाटा कैपिटल को क्या होगा फायदा?

टाटा कैपिटल (Tata Capital) का कुल नेट AUM 2.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। अभी तक कंपनी का फोकस रिटेल लोन, SME लोन और कॉर्पोरेट लोन पर था। अब गोल्ड लोन जुड़ने से उसका रिटेल पोर्टफोलियो और मजबूत होगा।

कंपनी के MD और CEO राजीव सभरवाल के अनुसार, गोल्ड लोन एक सुरक्षित (Secured) लेंडिंग बिजनेस है, जिसमें तेजी से ग्रोथ की संभावना है। इससे कंपनी का लोन पोर्टफोलियो और अधिक विविध (Diversified) बनेगा और भविष्य में कम जोखिम के साथ बेहतर कमाई का अवसर मिलेगा।


भारत में क्यों बढ़ रहा है गोल्ड लोन का कारोबार?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, मई के अंत तक NBFC का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 69% बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे साफ है कि यह सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और आसान लोन उपलब्ध होने से ग्राहक भी इस विकल्प को पसंद कर रहे हैं।

ब्रोकरेज फर्म IIFL Capital का मानना है कि योगलोंस (Yogloans) का लोन बुक भविष्य में करीब 5% Return on Assets (RoA) दे सकता है, जबकि टाटा कैपिटल (Tata Capital) का अनुमानित RoA करीब 2.2% है, यानी यह अधिग्रहण कंपनी की कमाई और मुनाफे दोनों को मजबूत कर सकता है।


क्या मुथूट फाइनेंस और मनप्पुरम को मिलेगी चुनौती?

अब तक भारत के गोल्ड लोन बाजार में मुथूट फाइनेंस और मनप्पुरम फाइनेंस जैसी कंपनियों का दबदबा रहा है। लेकिन टाटा ग्रुप (Tata Group) जैसे बड़े और भरोसेमंद ब्रांड की एंट्री से इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। मजबूत वित्तीय स्थिति, बड़ा ग्राहक आधार और तकनीकी क्षमता के दम पर टाटा कैपिटल (Tata Capital) आने वाले सालों में गोल्ड लोन मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश करेगी।

टाटा कैपिटल (Tata Capital) का योगलोंस (Yogloans) में निवेश सिर्फ एक अधिग्रहण नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की रणनीति है। यदि कंपनी इस कारोबार का सफलतापूर्वक विस्तार करती है, तो आने वाले समय में यह टाटा कैपिटल (Tata Capital) के लिए कमाई का एक बड़ा इंजन बन सकता है।

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