राजपाल यादव से लेकर शिल्पा शेट्टी तक पैसों के विवादों में घिरे बॉलीवुड के ये चर्चित सितारे
राजपाल यादव का मामला उनकी फिल्म अता पता लापता से जुड़ा है। फिल्म के निर्माण के लिए उन्होंने एक कंपनी से पांच करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और समय पर भुगतान नहीं होने के कारण ब्याज के साथ राशि काफी बढ़ गई। इसके बाद चेक बाउंस और कर्ज अदायगी से जुड़ा मामला अदालत तक पहुंचा और अब इस मामले में उन्हें सजा सुनाई गई है।
अभिनेता सोनू सूद का नाम भी आर्थिक मामलों में चर्चा में रह चुका है। प्रवर्तन निदेशालय ने एक कथित सट्टेबाजी ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनसे पूछताछ की थी। जांच के दौरान उनकी कुछ संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच भी किया गया था। हालांकि मामले की जांच आगे भी जारी रही।
दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती का नाम भी शारदा चिट फंड मामले में सामने आया था। इस विवाद के बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया और अपना पक्ष भी रखा।
अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस का नाम कथित 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कई बार सुर्खियों में रहा। उन पर आरोप है कि उन्हें आरोपी सुकेश चंद्रशेखर से महंगे उपहार और आर्थिक लाभ मिले। इसी मामले में अभिनेत्री नोरा फतेही से भी पूछताछ की जा चुकी है और उनका नाम भी जांच के दौरान सामने आया था।
अमीषा पटेल भी एक पुराने चेक बाउंस विवाद को लेकर चर्चा में रही हैं। उन पर एक कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के बाद भुगतान से जुड़े विवाद का आरोप लगा था। इस मामले में अदालत की ओर से कार्रवाई भी हुई थी जबकि अभिनेत्री का कहना रहा कि यह मामला काफी पहले सुलझाया जा चुका है।
अभिनेता डिनो मोरिया का नाम मीठी नदी सफाई परियोजना से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले की जांच के दौरान सामने आया। जांच एजेंसी ने उनसे पूछताछ की और मामले की जांच अभी भी विभिन्न स्तरों पर जारी है।
श्रेयस तलपड़े भी एक कथित निवेश योजना से जुड़े विवाद में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर चुके हैं। निवेशकों की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। वहीं फिल्म निर्माता और निर्देशक राजकुमार संतोषी का नाम भी अलग अलग चेक बाउंस मामलों में सामने आता रहा है।
अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा का नाम भी बिटकॉइन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में चर्चा में रहा। प्रवर्तन निदेशालय ने जांच के दौरान उनकी कुछ संपत्तियों पर कार्रवाई भी की थी। हालांकि इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया अलग अलग चरणों में चलती रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि किसी भी आर्थिक या वित्तीय विवाद में नाम सामने आने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं होता। कई मामलों की जांच अभी भी जारी है जबकि कुछ मामलों में अदालतों में सुनवाई चल रही है। अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाता है।
