July 11, 2026

हिजबुल कमांडर के बयान से पाकिस्तान की भूमिका पर फिर उठे सवाल, कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी का किया सार्वजनिक दावा

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नई दिल्ली । प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी सुप्रीम कमांडर शमशेर खान का एक कथित वीडियो सामने आने के बाद सीमा पार आतंकवाद को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वीडियो में उसने दावा किया है कि पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से आए आतंकी कश्मीर में सक्रिय रहे और उनकी कब्रें घाटी के अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद हैं। इस बयान को सुरक्षा मामलों के जानकार महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि इसमें सीमा पार से आतंकवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से दावा किया गया है।

वीडियो में शमशेर खान कथित तौर पर कहता दिखाई देता है कि कुपवाड़ा, लोलाब और कठुआ सहित कश्मीर के अनेक इलाकों में ऐसे कब्रिस्तान हैं, जहां पाकिस्तान से आए आतंकियों को दफनाया गया है। उसने अपने संबोधन में इन लोगों को कश्मीर में लड़ाई के दौरान मारे जाने का दावा करते हुए उनके प्रति समर्थन भी व्यक्त किया। साथ ही उसने पाकिस्तान और कश्मीर के संबंधों को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि इस रिश्ते को कोई समाप्त नहीं कर सकता।

इसी भाषण के दौरान उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर भी तीखा हमला बोला। उसने संगठन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे अपने विचारों के विपरीत बताया और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार के समझौते का विरोध किया। उसके बयान में संगठन के प्रति कड़ी आलोचना और राजनीतिक मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।

मिली जानकारी के अनुसार यह भाषण आठ जुलाई को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया था। यह कार्यक्रम हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर बुरहान वानी की बरसी के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम स्थल पर बुरहान वानी और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के पोस्टर भी लगाए गए थे। इस आयोजन में मौजूद लोगों के बीच शमशेर खान ने अपना संबोधन दिया, जिसका वीडियो बाद में सामने आया।

सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान भारत की लंबे समय से व्यक्त उस चिंता के संदर्भ में चर्चा का विषय बनते हैं जिसमें सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन मिलने की बात कही जाती रही है। हालांकि किसी भी वीडियो या दावे की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा ही की जा सकती है। ऐसे मामलों में आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाता है।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां लगातार आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं और सीमा पार से घुसपैठ रोकने के लिए निगरानी भी बढ़ाई गई है। पिछले कुछ वर्षों में कई आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने और घुसपैठ की कोशिशों को विफल करने के लिए व्यापक अभियान चलाए गए हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वीडियो और सार्वजनिक बयान सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना स्रोत भी बन सकते हैं। यदि इनमें किए गए दावों की पुष्टि होती है तो यह सीमा पार आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क और गतिविधियों को समझने में मदद कर सकते हैं। फिलहाल इस वीडियो और उसमें किए गए दावों को लेकर संबंधित एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों और सूचनाओं के आधार पर स्थिति का आकलन कर रही हैं।

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