July 11, 2026

भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

0
25-1783587013
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई मजबूती देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था की पुष्टि भी की गई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, निवेश और व्यापारिक सहयोग जैसे कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक सहयोग पर भी पड़ेगा।

संयुक्त बयान में दोनों देशों ने वर्ष 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था को आगे बढ़ाने की पुष्टि की। इस निर्णय को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों में संयुक्त सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख दोहराते हुए हर प्रकार के आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ की कड़ी निंदा की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों, उनके समर्थकों, वित्तपोषकों और सहयोगियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों ने आतंकवाद से जुड़े खतरों, ऑनलाइन कट्टरपंथ, नई तकनीकों के दुरुपयोग, आतंकी वित्तपोषण और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों नेताओं ने नियम-आधारित व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, हवाई आवाजाही और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर बल देते हुए क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा प्रयास जारी रखने की बात कही।

यात्रा के दौरान आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में दोनों देशों के उद्योगपतियों और निवेशकों ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऊर्जा, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और निवेश से जुड़ी योजनाओं को साझा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। वहीं ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा सहयोग, निवेश और व्यापारिक साझेदारी से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच विश्वास और समन्वय पहले की तुलना में अधिक मजबूत होने की संभावना है। यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को व्यापक और दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *