अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इजरायल की बढ़ी सैन्य तैयारी, ट्रंप के फैसले पर टिकी नजर, पश्चिम एशिया में फिर गहराया युद्ध का खतरा
बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा सैन्य टकराव आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे परिदृश्य में यदि अमेरिका अपने सहयोगी देशों से समर्थन चाहता है तो इजरायल भी संभावित सैन्य अभियान का हिस्सा बन सकता है। अधिकारियों का कहना है कि देश पहले भी अपने रणनीतिक सहयोगियों के साथ सुरक्षा अभियानों में भाग ले चुका है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार रहेगा।
इजरायल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया कि यदि हालात की मांग हुई तो देश दोबारा कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी पक्ष क्षेत्र में नए युद्ध की स्थिति नहीं चाहता, लेकिन ईरान की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरक्षा से जुड़े निर्णय क्षेत्रीय हालात और सहयोगी देशों के साथ समन्वय को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
दूसरी ओर इजरायली रक्षा बलों का आकलन है कि वर्तमान समय में ईरान भी सीधे इजरायल को इस संघर्ष में शामिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है। सेना का मानना है कि निकट भविष्य में इजरायल पर किसी बड़े हमले की आशंका सीमित है। इसके बावजूद सीमाओं की निगरानी बढ़ा दी गई है और सभी सैन्य इकाइयों को उच्च स्तर की तैयारियों में रखा गया है ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति का तुरंत जवाब दिया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। अमेरिका ने हालिया सैन्य कार्रवाई को इस क्षेत्र से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि कई देशों की नजर इस क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों पर बनी हुई है।
अमेरिकी नेतृत्व की ओर से भी हाल के दिनों में ईरान के प्रति कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए गए हैं। अमेरिका ने यह स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में उसकी प्राथमिकता क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही यह भी संकेत मिले हैं कि कूटनीतिक विकल्पों के साथ-साथ सैन्य तैयारियों को भी बनाए रखा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसके व्यापक असर पड़ सकते हैं। ऐसे में दुनिया की प्रमुख शक्तियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद की जा रही है कि तनाव को नियंत्रित रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी समानांतर रूप से जारी रहेंगे।
