कल्याणी इम्पेक्स पर ED की बड़ी कार्रवाई, कनाडा, अमेरिका और UAE में अघोषित संपत्तियों व बैंक खातों के मिले अहम सुराग
जांच के दौरान ईडी को ऐसे संकेत मिले हैं कि कंपनी के निर्यात से प्राप्त होने वाली कुछ विदेशी रकम निर्धारित समय के भीतर भारत नहीं लाई गई। एजेंसी के अनुसार, लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने के बावजूद बकाया राशि की वसूली के लिए आवश्यक दस्तावेजी प्रयास नहीं किए गए। इससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों के संभावित उल्लंघन की आशंका और मजबूत हुई है।
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ निर्यात भुगतान उन विदेशी कंपनियों से प्राप्त हुए, जिनका नाम निर्यात दस्तावेजों, इनवॉइस या शिपिंग बिल में खरीदार अथवा भुगतानकर्ता के रूप में दर्ज नहीं था। ईडी का मानना है कि इस प्रकार के लेनदेन की प्रकृति और उद्देश्य की गहन जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि भुगतान प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या नहीं।
जांच एजेंसी ने अब तक कनाडा, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कई अघोषित विदेशी बैंक खातों और संभावित निवेशों की पहचान किए जाने का दावा किया है। इन खातों और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इन खातों और संपत्तियों की जानकारी संबंधित भारतीय प्राधिकरणों के समक्ष विधिवत घोषित की गई थी या नहीं।
तलाशी अभियान के दौरान बरामद दस्तावेजों से यह भी संकेत मिले हैं कि धर्मेश नरेंद्र संगानी की कनाडा में संचालित एक कंपनी में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हो सकती है। जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस विदेशी निवेश और उससे जुड़े बैंक खातों की जानकारी नियामकीय संस्थाओं को उपलब्ध कराई गई थी। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात में भी कुछ अघोषित संपत्तियों के संबंध में दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है।
ईडी ने तलाशी के दौरान प्राप्त दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य सामग्री को अपने कब्जे में लेकर उनकी फोरेंसिक और वित्तीय जांच शुरू कर दी है। एजेंसी विभिन्न देशों से जुड़े वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और विदेशी संस्थाओं के साथ कारोबारी संबंधों का भी विश्लेषण कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी जानकारी साझा करने और सहयोग लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
फिलहाल यह जांच प्रारंभिक चरण में है और एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय करेगी। मामले में संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष भी जांच प्रक्रिया के दौरान दर्ज किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है या नहीं तथा इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
