July 11, 2026

बंगाल में भ्रष्टाचार की परतें खोलेगी सरकार टीएमसी के 15 साल के कार्यकाल पर तैयार होगा व्हाइट पेपर

0
untitled-1783669149

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के पिछले 15 वर्षों के शासनकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। सरकार इस पूरे कार्यकाल का लेखा जोखा जनता के सामने रखने के लिए एक श्वेत पत्र तैयार करेगी जिसमें विभिन्न विभागों में सरकारी धन के उपयोग और कथित अनियमितताओं का विस्तृत ब्यौरा शामिल रहेगा। इस दिशा में गठित मंत्रियों के उच्च स्तरीय समूह ने राज्य सचिवालय नबन्ना में अपनी पहली बैठक कर आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की।

बैठक की अध्यक्षता राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने की। इसमें विभिन्न विभागों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया समय सीमा और रिपोर्ट तैयार करने के प्रारूप पर विस्तार से विचार किया गया। सरकार का कहना है कि यह दस्तावेज केवल आरोपों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि विभागवार आधिकारिक रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया जाएगा ताकि पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

सरकारी सूत्रों के अनुसार श्वेत पत्र में उन मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां सरकारी धन के दुरुपयोग हेरफेर या अनियमित खर्च की आशंका है। खास तौर पर केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिले फंड के उपयोग की गहन समीक्षा होगी। यह भी देखा जाएगा कि जिन योजनाओं के लिए धन स्वीकृत किया गया था क्या वह उसी उद्देश्य पर खर्च हुआ या फिर किसी अन्य कार्य में उसका इस्तेमाल किया गया। जिन परियोजनाओं में धन खर्च ही नहीं किया गया उनकी भी अलग से समीक्षा की जाएगी।

सरकार ने सभी विभागों को अपने पुराने रिकॉर्ड वित्तीय दस्तावेज और संबंधित फाइलों की जांच कर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर मंत्रियों का समूह एक प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपा जाएगा। इसके बाद आवश्यक परीक्षण और समीक्षा पूरी होने पर अंतिम श्वेत पत्र सार्वजनिक किया जाएगा।

बैठक में वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता के अलावा मंत्री दिलीप घोष तापस रॉय अरूप दास और दीपक बर्मन भी मौजूद रहे। सभी मंत्रियों ने संबंधित विभागों से पारदर्शी और तथ्य आधारित जानकारी जुटाने पर जोर दिया ताकि रिपोर्ट विश्वसनीय और प्रमाणिक बन सके।

यह कदम राज्य सरकार द्वारा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान की गई घोषणा के बाद उठाया गया है। सरकार पहले ही संकेत दे चुकी थी कि पिछले शासनकाल में हुए कथित वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के मामलों का पूरा ब्यौरा तैयार कर जनता के सामने रखा जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी और भविष्य में सरकारी धन के उपयोग में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

दूसरी ओर इस पहल को लेकर राज्य की राजनीति भी गर्म होने लगी है। आने वाले समय में श्वेत पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विभागों से जुटाए गए दस्तावेजों और आंकड़ों के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट में कौन कौन से तथ्य सामने आते हैं और उसका राज्य की राजनीति पर कितना व्यापक प्रभाव पड़ता है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *