PM मोदी का इंडोनेशिया दौरा: मुस्लिम देश के ऐतिहासिक प्रम्बानान मंदिर से दुनिया को मिलेगा सांस्कृतिक एकता का संदेश
इंडोनेशिया भले ही दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश हो लेकिन यहां प्राचीन हिंदू और बौद्ध विरासत को आज भी पूरे सम्मान के साथ संरक्षित किया गया है। योग्याकार्ता में स्थित प्रम्बानान मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। नौवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे विशाल हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है। हर वर्ष लाखों पर्यटक और श्रद्धालु इस अद्भुत धरोहर को देखने यहां पहुंचते हैं।
प्रम्बानान मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी त्रिमूर्ति आधारित वास्तुकला है। मंदिर परिसर में भगवान शिव भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित तीन प्रमुख मंदिर बनाए गए हैं। इनमें भगवान शिव का मंदिर सबसे विशाल और भव्य है जिसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव कराती है। इसके अलावा नंदी गरुड़ और हंस जैसे त्रिमूर्ति के वाहनों के लिए भी अलग मंदिर बनाए गए हैं जो इस परिसर की धार्मिक और स्थापत्य भव्यता को और बढ़ाते हैं।
प्रम्बानान मंदिर अपनी उत्कृष्ट नक्काशी और शिल्पकला के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। मंदिर की दीवारों पर रामायण और भागवत पुराण की कथाओं को पत्थरों पर बेहद बारीकी से उकेरा गया है। इन कलाकृतियों से स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का प्रभाव सदियों पहले इंडोनेशिया तक पहुंच चुका था। मंदिर परिसर में प्रतिदिन आयोजित होने वाला रामायण बैले नृत्य कार्यक्रम भी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है और भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ उनकी वार्ता में द्विपक्षीय सहयोग व्यापार निवेश समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे।
प्रम्बानान मंदिर की यात्रा इस बात का भी संदेश देती है कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल कूटनीतिक और आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं बल्कि उनकी जड़ें साझा इतिहास संस्कृति और सभ्यता में गहराई से जुड़ी हुई हैं। ऐसे समय में जब दुनिया सांस्कृतिक संवाद और सहयोग की जरूरत महसूस कर रही है तब यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देने के साथ वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक एकता और विरासत संरक्षण का मजबूत संदेश भी देगी।
