July 4, 2026

उज्जैन का काल भैरव मंदिर क्यों है दुनिया भर में प्रसिद्ध, जानिए शराब के भोग और अनोखी मान्यता का रहस्य

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नई दिल्ली। धार्मिक नगरी उज्जैन अपने विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के साथ साथ अनेक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिरों के लिए भी जानी जाती है। इन्हीं में से एक है बाबा काल भैरव का प्राचीन मंदिर जहां सदियों से चली आ रही एक ऐसी परंपरा आज भी निभाई जाती है जो पहली बार सुनने वाले को हैरान कर देती है। यहां भगवान को पेड़े लड्डू या मिठाई का नहीं बल्कि मदिरा का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु फूल माला और प्रसाद के साथ शराब की बोतल लेकर मंदिर पहुंचते हैं और इसे बाबा काल भैरव को श्रद्धा भाव से अर्पित करते हैं। यही अनूठी परंपरा इस मंदिर को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में विशेष पहचान दिलाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप माने जाते हैं। तंत्र साधना और शैव परंपरा में उनका विशेष महत्व है। तांत्रिक मान्यता के अनुसार काल भैरव की पूजा में मदिरा का भोग स्वीकार्य माना गया है। इसी कारण इस मंदिर में वर्ष भर श्रद्धालु बाबा को मदिरा अर्पित करते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह परंपरा कई सौ वर्षों से लगातार चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और विधि विधान के साथ निभाई जाती है।

इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण वह रहस्यमयी दृश्य है जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पहुंचते हैं। जब कोई भक्त मदिरा अर्पित करता है तो मंदिर के पुजारी उसे एक छोटी धातु की थाली या पात्र में लेकर बाबा काल भैरव की प्रतिमा के मुख से लगाते हैं। कुछ ही क्षणों में पूरा पात्र खाली हो जाता है और ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रतिमा स्वयं भोग ग्रहण कर रही हो। प्रतिमा में कोई स्पष्ट छेद या पाइप दिखाई नहीं देता फिर भी मदिरा गायब हो जाती है। वर्षों से यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का विषय बना हुआ है। इस रहस्य को लेकर अनेक तरह की चर्चाएं होती रही हैं लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह बाबा काल भैरव की दिव्य कृपा और चमत्कार का प्रतीक है।

मंदिर के बाहर का वातावरण भी अन्य धार्मिक स्थलों से अलग दिखाई देता है। जहां अधिकांश मंदिरों के बाहर फूल माला नारियल और मिठाई की दुकानें होती हैं वहीं यहां पूजा सामग्री के साथ मदिरा की अधिकृत बोतलें भी उपलब्ध रहती हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग के लिए बोतल खरीदते हैं और मंदिर में अर्पित करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करने के बाद शेष मदिरा को प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है जिसे लोग आस्था के साथ ग्रहण करते हैं।

काल भैरव को उज्जैन नगरी का कोतवाल या रक्षक भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाकालेश्वर के दर्शन के साथ काल भैरव के दर्शन किए बिना उज्जैन की धार्मिक यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले बाबा महाकाल के दर्शन करते हैं और फिर काल भैरव मंदिर पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। विशेष अवसरों पर यहां दूरदराज के राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

काल भैरव मंदिर केवल अपनी अनोखी परंपरा के कारण ही नहीं बल्कि आस्था और आध्यात्मिक विश्वास के केंद्र के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहां आने वाले भक्तों के लिए मदिरा का भोग किसी सामान्य वस्तु का अर्पण नहीं बल्कि धार्मिक परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक है। यही वजह है कि उज्जैन का यह प्राचीन मंदिर आज भी देश के सबसे अनूठे और चर्चित धार्मिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।

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