स्पीड पोस्ट और कूरियर के जरिए 21 राज्यों में फैलाया गया करोड़ों का गांजा नेटवर्क बेनकाब, घर-घर पार्सल पहुंचाकर चल रहा था संगठित ड्रग्स कारोबार
नई दिल्ली । देशभर में स्पीड पोस्ट और निजी कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से गांजा सप्लाई करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह 21 राज्यों तक अपना नेटवर्क फैला चुका था और ऑनलाइन ऑर्डर मिलने के बाद पार्सल के माध्यम से ग्राहकों के घरों तक मादक पदार्थ पहुंचाए जाते थे। मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े कई अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार और सुनियोजित तस्करी तंत्र के संचालन के संकेत मिले हैं।
पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब डाक के माध्यम से भेजे जा रहे एक संदिग्ध पार्सल की जांच की गई। इसके बाद दूसरे पार्सलों की पड़ताल शुरू हुई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे पैकेटों के जरिए गांजे की आपूर्ति कर रहा था। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली का विश्लेषण किया तो सामने आया कि पार्सलों में मादक पदार्थों को सामान्य घरेलू सामान या दवाइयों के रूप में दर्शाकर भेजा जाता था, ताकि किसी को संदेह न हो।
प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्राहकों के ऑर्डर पूरा करता था। रोजाना कई स्पीड पोस्ट और कूरियर पार्सलों के जरिए 50 से 250 ग्राम तक गांजा विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था। प्रत्येक पार्सल की कीमत उसकी मात्रा के अनुसार तय होती थी और पूरे कारोबार से प्रतिदिन लाखों रुपये का लेनदेन होने का अनुमान है। मासिक और वार्षिक स्तर पर यह अवैध कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच चुका था।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क करता था। ऑर्डर प्राप्त होने के बाद डिजिटल भुगतान के जरिए रकम ली जाती थी और फिर पैकेज तैयार कर अलग-अलग स्थानों पर भेज दिए जाते थे। नेटवर्क में शामिल प्रत्येक सदस्य की अलग जिम्मेदारी तय थी। कोई पैकेजिंग करता था, कोई पार्सल बुक कराता था, जबकि अन्य सदस्य मादक पदार्थों की खरीद, भंडारण और वितरण का काम संभालते थे। इससे पूरे नेटवर्क का संचालन व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार गिरोह अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कोड वर्ड का भी इस्तेमाल करता था। मादक पदार्थ की मात्रा और गुणवत्ता बताने के लिए सामान्य शब्दों का प्रयोग किया जाता था, जिससे बातचीत के दौरान संदेह की संभावना कम रहे। अवैध कमाई को छिपाने के लिए विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई आईडी का उपयोग किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि अवैध आय का एक हिस्सा सोने, महंगी गाड़ियों और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो स्थानीय खरीदारों को भी गिरफ्तार किया, जिनके कब्जे से गांजा बरामद किया गया। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं और इसके माध्यम से लंबे समय से मादक पदार्थों की आपूर्ति की जा रही थी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड तथा पार्सल बुकिंग से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच जारी है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक तस्करी गिरोह तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे व्यापक अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है। ऐसे में वित्तीय लेनदेन, सप्लाई चेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से संगठित ड्रग्स तस्करी के ऐसे तरीकों पर प्रभावी अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी और भविष्य में इस तरह के नेटवर्क के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।
