July 3, 2026

आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील

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नई दिल्ली। भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ साझा और सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

पहलगाम और दिल्ली आतंकी हमलों की निंदा
संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही 29 जुलाई 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया, जिसमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का जिक्र किया गया था।

दोनों नेताओं ने नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए आतंकी हमले की भी निंदा करते हुए कहा कि इस हमले के दोषियों, साजिशकर्ताओं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वालों को बिना किसी देरी के कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

प्रतिबंधित आतंकी संगठनों पर निर्णायक कार्रवाई की मांग
संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और जापान आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के हर रूप की बिना किसी शर्त के निंदा करते हैं। दोनों देशों ने विशेष रूप से पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को गंभीर चिंता का विषय बताया।

साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बयान में अल-कायदा, आईएसआईएस (ISIS), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और इनके सहयोगी संगठनों का भी उल्लेख किया गया।

आतंक की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों पर सख्ती की अपील
भारत और जापान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने, आतंकियों की वित्तीय मदद रोकने, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से उनके संबंध तोड़ने और सीमा पार आतंकियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समन्वित कार्रवाई करने का आह्वान किया।

रणनीतिक साझेदारी को मिला नया संदेश
यह संयुक्त बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा लगातार उठा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत और जापान का यह साझा रुख दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का संकेत भी माना जा रहा है।

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