नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर लोग भोपाल की जर्जर मल्टियों में बारिश बन रही आफत कचरा सीलन और गिरती इमारतों ने बढ़ाई चिंता
मल्टी में रहने वाली महिलाओं का कहना है कि सुबह घर का दरवाजा खोलते ही कचरे की दुर्गंध उनका स्वागत करती है जबकि रातें इस चिंता में गुजरती हैं कि कहीं कमजोर हो चुकी दीवारें या छत भरभराकर न गिर जाएं। कई घरों में बारिश के दौरान छत से लगातार पानी टपकता है जिससे बेडरूम रसोई और पूरे घर में सीलन फैल जाती है। लोगों का कहना है कि कई बार सीवेज का गंदा पानी भी घरों तक पहुंच जाता है जिससे बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।
शबरी नगर में करीब चालीस से अधिक बहुमंजिला इमारतें हैं जिनमें एक हजार से ज्यादा परिवार रहते हैं। इनमें कुछ इमारतें करीब बीस वर्ष पुरानी हैं जबकि कई पंद्रह वर्ष पहले बनाई गई थीं। समय के साथ इन भवनों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि जगह जगह दरारें दिखाई देती हैं। कई दीवारों में पेड़ उग आए हैं। छतों पर घास और झाड़ियां फैल चुकी हैं। कई स्थानों पर प्लास्टर झड़ चुका है और लोहे की सरिया बाहर नजर आने लगी है। लोगों का कहना है कि हल्का सा झटका भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम नियमित रूप से टैक्स और अन्य शुल्क तो वसूलता है लेकिन सफाई और रखरखाव की ओर कोई ध्यान नहीं देता। नालियां जाम रहती हैं सड़कों पर पानी भर जाता है और जगह जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं। खुले बिजली बोर्ड बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं जबकि टूटे पाइप और खराब सीवेज व्यवस्था ने हालात और खराब कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वादे करने जरूर आते हैं लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं फिर अनदेखी कर दी जाती हैं।
यह समस्या केवल शबरी नगर तक सीमित नहीं है। अर्जुन नगर श्याम नगर राहुल नगर और बीडीए के अंजली कॉम्प्लेक्स सहित शहर की कई सरकारी मल्टियों में रहने वाले लोग भी इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। जर्जर भवनों खुले नालों गंदगी और जलभराव के कारण हजारों परिवार असुरक्षित माहौल में रहने को मजबूर हैं।
इधर भोपाल की महापौर मालती राय का कहना है कि नगर निगम जर्जर इमारतों की पहचान कर रहा है और जहां भवन रहने योग्य नहीं हैं वहां लोगों को खाली करने की सूचना दी जा रही है। साथ ही सीवेज सफाई जल निकासी और गंदगी की समस्या दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि रहवासियों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासनों से ज्यादा जमीन पर दिखाई देने वाले काम का इंतजार है क्योंकि उनकी सबसे बड़ी जरूरत सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन है।
