जेट फ्यूल हुआ सस्ता, एयरलाइंस को राहत, आने वाले दिनों में हवाई किराए घटने की उम्मीद
जेट फ्यूल की कीमत में आई इस कमी से घरेलू एयरलाइंस कंपनियों को परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) में राहत मिलने की उम्मीद है। ऐसे में यदि यह राहत आगे भी बनी रहती है, तो आने वाले समय में हवाई यात्रियों को किराए में भी कुछ कमी देखने को मिल सकती है।
जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद एटीएफ के दाम घटाए गए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के दौरान जेट फ्यूल की कीमत रिकॉर्ड स्तर 1.15 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई थी। उसके बाद पहली बार इसमें कटौती की गई है।
आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के औसत भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर के आधार पर एटीएफ की कीमतों में संशोधन किया जाता है। हालांकि, किसी आपात या विशेष परिस्थिति में कीमतों में बीच महीने भी बदलाव किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में सबसे बड़ा हिस्सा जेट फ्यूल का होता है। ऐसे में एटीएफ सस्ता होने से कंपनियों का खर्च कम होगा, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों तक भी पहुंच सकता है।
टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तारकेश्वर नाथ वैष्णव के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता घटी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है और फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 70 से 73 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक की गिरावट आती है, तो जेट फ्यूल के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कटौती की संभावना बन सकती है।
वैष्णव ने बताया कि निजी क्षेत्र की नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की शुरुआत कर दी है। अब बाजार की नजर सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) पर है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम बनी रहती हैं, तो ये कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने का फैसला ले सकती हैं।
