June 30, 2026

शीर्षक विकल्प 3 बादल आते हैं लेकिन बरसते नहीं इंदौर में कमजोर मानसून ने बढ़ाई उमस और गर्मी आज शाम बदल सकता है मौसम

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इंदौर  इंदौर में मानसून की दस्तक के बावजूद बारिश की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सकी है। जून का महीना समाप्ति की ओर है लेकिन अब तक शहर में करीब 4 इंच वर्षा ही दर्ज की गई है। अच्छी बारिश का आखिरी दौर 24 जून को देखने को मिला था जब शहर के अलग अलग हिस्सों में आधा इंच से लेकर करीब 2 इंच तक पानी बरसा था। इसके बाद मौसम में लगातार बदलाव तो देखने को मिला लेकिन तेज बारिश नहीं हो सकी।

पिछले एक सप्ताह से दोपहर बाद आसमान में बादल छा रहे हैं और बारिश जैसे हालात बन रहे हैं लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की बूंदाबांदी या रिमझिम तक ही मौसम सीमित रह गया। मंगलवार सुबह भी धूप और बादलों की आवाजाही का सिलसिला जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार शाम के समय हल्की बारिश होने की संभावना है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।

कम बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले सात दिनों से दिन का अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है जो सामान्य से लगभग एक डिग्री अधिक है। वहीं रात का तापमान भी लगातार 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। सामान्य से अधिक तापमान के कारण दिन में उमस और रात में गर्मी लोगों को परेशान कर रही है।

इस वर्ष 24 जून को मध्य प्रदेश में मानसून ने प्रवेश किया था और इंदौर सहित प्रदेश के 15 जिलों में इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह आगे बढ़ने के बजाय एक क्षेत्र में ही ठहर गया। इसी वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दोबारा सक्रिय होकर आगे बढ़ने के बाद ही व्यापक वर्षा का दौर शुरू होगा।

बारिश की कमी का असर केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। प्रदेश के उत्तरी क्षेत्रों खासकर ग्वालियर चंबल सागर और रीवा संभाग में भी तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। इन इलाकों में भी लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून के महीने में इंदौर में तापमान में अच्छी गिरावट देखने को मिलती रही है और औसतन पर्याप्त वर्षा भी दर्ज होती रही है। पिछले वर्ष जून में शहर में लगभग साढ़े पांच इंच बारिश हुई थी जबकि वर्ष 1980 में जून के महीने में 17 इंच से अधिक वर्षा का रिकॉर्ड बना था। वहीं 23 जून 2003 को 24 घंटे में करीब 5 इंच बारिश दर्ज की गई थी जो आज भी एक बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में यदि मानसून सक्रिय होता है तो बारिश की रफ्तार तेज हो सकती है। फिलहाल शहरवासियों को हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही के बीच उमस भरे मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

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