लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर ओपी राजभर का हमला, बोले- भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना, 'सैफई परिवार को मिलेगी सजा
ओपी राजभर ने कहा कि यदि किसी को अखिलेश यादव सरकार के समय हुए भ्रष्टाचार के उदाहरण देखने हों तो लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे सबसे बड़ा उदाहरण है। उनका आरोप है कि निजी लाभ और धन कमाने की लालसा में एक्सप्रेसवे के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई, जिसके कारण यह सड़क हादसों का केंद्र बन गई। उन्होंने दावा किया कि कई लोग इसे “मौत का एक्सप्रेसवे” भी कहने लगे हैं क्योंकि यहां बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं हुई हैं।
राजभर ने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान सैफई परिवार और उनके करीबी लोगों ने जनता के धन का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि फिरोजाबाद से लेकर इटावा तक जमीन खरीद और मुआवजे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। उनके मुताबिक पहले औने-पौने दाम पर जमीनें खरीदी गईं, फिर एक्सप्रेसवे का रूट बदला गया और रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीनों को आवासीय श्रेणी में दिखाया गया, जिससे भारी मुआवजा हासिल किया जा सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे की घोषणा के बाद भी कई जमीनों की रजिस्ट्रियां कराई गईं और बाद में उन जमीनों का मुआवजा लिया गया। राजभर का दावा है कि एक्सप्रेसवे का मार्ग इस तरह बदला गया कि सैफई परिवार और उनसे जुड़े लोगों की जमीनों का मूल्य कई गुना बढ़ गया।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मूल रूप से करीब 270 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे निजी हितों के चलते 300 किलोमीटर से अधिक लंबा कर दिया गया। उनका कहना था कि इसका खामियाजा आज भी आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। लंबी दूरी तय करने के कारण यात्रियों का समय, ईंधन और पैसा तीनों अधिक खर्च हो रहे हैं।
ओपी राजभर ने कहा कि इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की परतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उनके पास कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं और समय आने पर सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार करने वालों को सजा मिलेगी और कानून अपना काम करेगा।
राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी माहौल गर्म हो गया है। हालांकि, इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
