भारत-मंगोलिया दोस्ती को नई मजबूती विदेश मंत्री जयशंकर ने रिफाइनरी प्रोजेक्ट की प्रगति परखी
निर्माण स्थल के दौरे के दौरान विदेश मंत्री ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों और इंजीनियरों के साथ विस्तृत चर्चा की तथा विभिन्न चरणों में चल रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने इस परियोजना को भारत और मंगोलिया की मित्रता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के सहयोग का एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण उदाहरण है।
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मंगोल रिफाइनरी परियोजना भारत-मंगोलिया मित्रता का एक प्रमुख प्रतीक है और इसका निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने परियोजना में शामिल विभिन्न टीमों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद सभी कर्मचारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं।
दौरे के दौरान विदेश मंत्री ने परियोजना स्थल पर कार्यरत भारतीय और मंगोलियाई कर्मचारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में कार्य कर रहे श्रमिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के समर्पण की प्रशंसा की तथा परियोजना को समय पर पूरा करने के उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।
मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख के साथ हुई बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और मंगोलिया के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंध मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास की समान आकांक्षाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाया है।
विदेश मंत्री ने बताया कि उनकी यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य पिछले वर्ष भारत दौरे पर आए मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई चर्चाओं के परिणामों की समीक्षा करना भी है। दोनों देशों ने हाल के वर्षों में आर्थिक, ऊर्जा, शिक्षा और विकास साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
तेल रिफाइनरी परियोजना को भारत-मंगोलिया सहयोग की सबसे महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। मंगोलिया के डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी क्षेत्र में निर्माणाधीन इस रिफाइनरी के लिए भारत सरकार ने 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध कराई है। यह भारत सरकार द्वारा विदेशों में वित्तपोषित सबसे बड़ी सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट परियोजनाओं में शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद मंगोलिया की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बड़ा बल मिलेगा और उसे पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह परियोजना दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भारत और मंगोलिया के बीच बढ़ता सहयोग यह दर्शाता है कि दोनों देश भविष्य में भी विकास, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
