इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत ने रचा नया इतिहास, तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बना सेक्टर; एआई और डेटा सेंटर निर्माण से मिलेगी नई रफ्तार
उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। एक समय था जब इस क्षेत्र का लक्ष्य केवल शीर्ष दस निर्यात श्रेणियों में शामिल होना था, लेकिन लगातार बढ़ती उत्पादन क्षमता, निवेश और वैश्विक मांग के कारण यह क्रमशः आगे बढ़ते हुए अब तीसरे स्थान तक पहुंच गया है। वर्तमान में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग लगभग 13 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
इसी क्रम में महाराष्ट्र के पुणे स्थित रंजनगांव में एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र आधुनिक तकनीकों पर आधारित उपकरणों के निर्माण के लिए विकसित किया गया है और इसे देश की तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई इकाई घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी उत्पादन करेगी, जिससे भारत के निर्यात को अतिरिक्त बल मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई वर्तमान समय में वैश्विक आर्थिक विकास की प्रमुख शक्ति बनकर उभरी है। दुनिया भर में एआई आधारित डेटा सेंटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है और इनके संचालन के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह केवल उपभोक्ता बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि एआई और डेटा सेंटर उद्योग के लिए जरूरी प्रमुख तकनीकी उपकरणों का उत्पादन भी देश के भीतर ही करे।
उन्होंने बताया कि नई विनिर्माण इकाई में एआई सिस्टम, डेटा सेंटर उपकरण, 5जी नेटवर्किंग उत्पाद, उच्च क्षमता वाले नेटवर्किंग समाधान, औद्योगिक ऊर्जा प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जटिल एवं उन्नत तकनीकी उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इससे भारत की तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि होगी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में उसकी भागीदारी और मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बढ़ोतरी केवल निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव रोजगार, कौशल विकास और स्थानीय उद्योगों पर भी पड़ता है। नई परियोजना के माध्यम से स्थानीय स्तर पर लगभग 11,000 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके अलावा बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी वैश्विक तकनीकी आपूर्ति शृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
इस परियोजना के माध्यम से स्थानीयकरण को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे कई इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और घटकों का उत्पादन देश के भीतर किया जा सकेगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को नई संभावनाएं प्राप्त होंगी। साथ ही भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी वृद्धि होगी।
उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में लगातार हो रही प्रगति भारत को वैश्विक तकनीकी उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एआई, डेटा सेंटर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण पर बढ़ता फोकस आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि, निर्यात क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
