June 18, 2026

सीहोर में ग्रामीणों ने पकड़े रेत से भरे ट्रैक्टर, चालक के पास न रॉयल्टी मिली न लाइसेंस

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सीहोर  सीहोर जिले के रफीगंज-लोदड़ी गांव में गुरुवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब ग्रामीणों ने रेत से भरे कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को गांव के भीतर से गुजरते हुए रोक लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से अवैध रेत परिवहन में लगे वाहन गांव के रास्तों का उपयोग कर रहे हैं और तेज रफ्तार के कारण लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए इस पूरे मामले को कानून व्यवस्था और जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।

ग्रामीणों के अनुसार, रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना किसी रोक-टोक के गांव की सड़कों पर दौड़ते हैं। कई बार वाहन चालक ग्रामीणों की चेतावनियों को नजरअंदाज कर चुके हैं। गांव के चौकीदार द्वारा भी उन्हें रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक और वाहन मालिकों ने किसी की बात नहीं मानी। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज रफ्तार के कारण बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

हाल ही में गांव में हुए एक हादसे ने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है। कुछ दिन पहले एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित एक दुकान में घुस गई थी। घटना के समय दुकान में मौजूद एक बच्ची को ग्रामीणों ने समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया और उन्होंने अवैध रेत परिवहन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

ग्रामीणों द्वारा रोके गए एक ट्रैक्टर चालक ने कैमरे के सामने स्वीकार किया कि उसके पास रेत परिवहन की कोई वैध रॉयल्टी नहीं है। इतना ही नहीं, वह ड्राइविंग लाइसेंस भी प्रस्तुत नहीं कर सका। चालक ने बताया कि वाहन मालिक के निर्देश पर वह गांव के रास्ते से रेत लेकर जा रहा था क्योंकि यह मार्ग छोटा और सीधा पड़ता है। इस खुलासे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

घटना के बाद माइनिंग विभाग, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वाहन बिना नंबर प्लेट, बिना रॉयल्टी और बिना लाइसेंस के खुलेआम सड़कों पर चल रहे हैं तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। कई ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट तक नहीं लगी थी, जिससे उनकी पहचान करना भी मुश्किल था।

ग्रामीणों ने मामले की सूचना पुलिस को डायल-100 के माध्यम से दी है और मांग की है कि गांव के अंदर से रेत परिवहन पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यदि रेत का वैध कारोबार किया जा रहा है तो वाहनों को मुख्य मार्गों का उपयोग करना चाहिए और सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखने चाहिए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के डर से रेत कारोबारी अब मुख्य सड़कों के बजाय ग्रामीण मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल गांव की सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। अब सभी की नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और अवैध रेत परिवहन पर कितना प्रभावी अंकुश लगा पाता है।

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