इंदौर में टमाटर के दाम 80 रुपए किलो के पार: एमपी की फसल खत्म, नई आवक तक राहत के आसार नहीं
शहर की प्रमुख देवी अहिल्याबाई फल एवं सब्जी मंडी, चोइथराम में टमाटर के भाव लगातार बढ़ रहे हैं। मंडी में महाराष्ट्र के उच्च गुणवत्ता वाले टमाटर 800 से 1000 रुपए प्रति कैरेट तक बिक रहे हैं। थोक बाजार में इनका भाव 50 से 60 रुपए प्रति किलो के बीच है, जबकि खुदरा बाजार में यही टमाटर 70 से 80 रुपए या उससे अधिक कीमत पर ग्राहकों को मिल रहा है।
व्यापारियों के अनुसार टमाटर की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ क्षेत्र में फसल का लगभग समाप्त हो जाना है। भीषण गर्मी और नई फसल की बुवाई के कारण किसानों के पास बिक्री योग्य टमाटर नहीं बचा है। वर्तमान में प्रदेश में केवल कुछ इलाकों में सीमित मात्रा में उत्पादन हो रहा है।
दूसरा बड़ा कारण राजस्थान से आने वाली सप्लाई में गिरावट है। कोटा और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला टमाटर भी अब कम हो रहा है। व्यापारियों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में वहां से आने वाली आवक लगभग बंद हो सकती है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
इसी बीच गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों से टमाटर की मांग बढ़ने के कारण भी कीमतों पर असर पड़ा है। मांग बढ़ने और आपूर्ति घटने के कारण बाजार में संतुलन बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। इसके अलावा मंडी नाका शुल्क में वृद्धि को भी कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण माना जा रहा है।
फिलहाल इंदौर मंडी में महाराष्ट्र के नारायणगांव, सलगमनेर और कलवन क्षेत्रों से टमाटर की खेप पहुंच रही है। व्यापारियों का कहना है कि आगामी तीन महीनों तक स्थिति लगभग इसी प्रकार बनी रह सकती है। यदि मानसून के दौरान परिवहन और भंडारण में दिक्कतें बढ़ती हैं तो कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। कुछ व्यापारियों का अनुमान है कि खुदरा बाजार में टमाटर का भाव 100 रुपए प्रति किलो तक भी पहुंच सकता है।
टमाटर के साथ अन्य हरी सब्जियों के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। शिमला मिर्च, गिलकी, हरी मिर्च और ग्वार फली जैसी सब्जियां भी महंगी हो गई हैं। जो सब्जियां कुछ समय पहले 20 से 30 रुपए प्रति किलो बिक रही थीं, वे अब 40 से 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई हैं।
व्यापारियों के अनुसार मालवा, निमाड़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे उत्पादक क्षेत्रों में गर्मी के कारण फसल प्रभावित हुई है। इसके चलते मंडियों में बड़ी मात्रा में माल नहीं पहुंच रहा है और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई फसल बाजार में आने और उत्पादन सामान्य होने के बाद ही उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत मिल सकेगी।
