रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी
नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के प्रमुख संगठन इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। अभिनेता रणवीर सिंह के फिल्म ‘डॉन 3’ को अचानक छोड़ने के बाद मनोरंजन उद्योग में शुरू हुई तीखी बहस के बीच अशोक पंडित ने साफ किया है कि किसी भी कलाकार की व्यावसायिक सफलता और उसके कानूनी अनुबंधों को अलग-अलग चश्मे से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का मकसद केवल फिल्म उद्योग के पेशेवर ताने-बाने की रक्षा करना है।
हाल ही में वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज फेडरेशन द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ जारी किए गए असहयोग निर्देश (नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव) को वापस लिए जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया था। इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हुए अशोक पंडित ने एक मीडिया बातचीत में बताया कि प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह को उस दौर में अपनी आगामी फिल्म के लिए साइन किया था, जब उनका हालिया स्टारडम वापस नहीं आया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब अभिनेता की लगातार चार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थीं, तब मेकर्स ने उन पर भरोसा जताते हुए ‘डॉन 3’ के लिए बहुत पहले ही अनुबंधित कर लिया था।
अशोक पंडित के अनुसार, सिनेमाई दुनिया में जब किसी भी कलाकार का करियर ऊंचाइयों को छूने लगता है, तब भी उसे उद्योग के पुराने रिश्तों और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले निर्माताओं को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बेहद सुखद बात है कि अभिनेता की हालिया फिल्म सफल रही है और वे वर्तमान में एक बेहद मजबूत स्थिति में काम कर रहे हैं, लेकिन नैतिकता का तकाजा यही कहता है कि विपरीत परिस्थितियों में हाथ थामने वाले लोगों के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। फिल्म उद्योग पूरी तरह से आपसी विश्वास, लिखित वादों और समय पर किए गए कमिटमेंट के बलबूते ही संचालित होता है।
बॉलीवुड में स्टारडम के बदलते स्वरूप पर बेहद बेबाकी से टिप्पणी करते हुए फिल्म समीक्षक और संगठन प्रमुख ने कहा कि इस फिल्म नगरी ने समय-समय पर कई ऐतिहासिक और विशाल स्टारडम देखे हैं। उन्होंने महान अभिनेता राजेश खन्ना, शाहरुख खान और सलमान खान के दौर के अभूतपूर्व स्टारडम का उदाहरण देते हुए कहा कि दर्शकों का असीम प्यार निश्चित रूप से अनमोल और सर्वोपरि होता है, परंतु व्यावसायिक प्रोफेशनलिज्म ही इस पूरी इंडस्ट्री की असली और मजबूत बुनियाद है। जनता फिल्मों के लिए तालियां बजाती है और सफलता का जश्न मनाती है, लेकिन फिल्म निर्माण के पर्दे के पीछे आपसी भरोसा सबसे ज्यादा मायने रखता है।
इसके साथ ही अशोक पंडित ने फिल्म निर्देशक आदित्य धर और उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ की जमकर तारीफ की। उनका मानना है कि इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने हिंदी फिल्म उद्योग को एक बहुत ही जरूरी और नया जीवनदान दिया है। उन्होंने ‘धुरंधर’ को बिजनेस के लिहाज से एक बेहतरीन ऑक्सीजन बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी शानदार फिल्म है जिसने दर्शकों को दोबारा भारी तादाद में सिनेमाघरों तक खींचने का काम किया है। हालांकि, फिल्म की इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाने के साथ ही उन्होंने पुरजोर तरीके से यह स्पष्ट किया कि ‘धुरंधर’ की सफलता को ‘डॉन 3’ के विवाद के साथ मिलाकर बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए।
अपनी बात को विराम देते हुए आईएफटीडीए के अध्यक्ष ने कहा कि दो अलग-अलग मामलों को आपस में मिलाने से केवल भ्रम और जटिलताएं पैदा होती हैं। फेडरेशन का एकमात्र और व्यापक उद्देश्य फिल्म उद्योग के पूरे इकोसिस्टम को सुरक्षित रखना और छोटे-बड़े सभी हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि संस्था का किसी भी अभिनेता या निर्माता से कोई व्यक्तिगत झगड़ा या शिकायत नहीं है, बल्कि उनकी एकमात्र चिंता यह सुनिश्चित करना है कि देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर काम करने का एक पारदर्शी, पेशेवर और भरोसेमंद माहौल हमेशा कायम रहे।
