एनडीए में शामिल होने की खबरों को किया खारिज, शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा- दीदी के साथ खड़ा हूं और रहूंगा
राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से ऐसी चर्चाएं तेज थीं कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और वे अपना राजनीतिक भविष्य किसी नए समीकरण के साथ जोड़ सकते हैं। इसी बीच कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि पार्टी के कई सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग राजनीतिक रुख अपनाने की इच्छा जताई है। इन चर्चाओं में शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी सामने आया था।
हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने उनके जीवन और राजनीतिक सफर के कठिन दौर में उनका साथ दिया था। ऐसे में उनके प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सम्मान हमेशा बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार की बगावत या दल बदल से जुड़े नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं।
सूत्रों के अनुसार भी ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है कि शत्रुघ्न सिन्हा ने किसी पत्र या प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हों। उनके करीबी लोगों का कहना है कि उनके नाम को लेकर जो दावे किए गए, वे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है।
दरअसल हाल के दिनों में शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से शुभकामनाएं देने के बाद राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला था। प्रधानमंत्री के लगातार लंबे कार्यकाल को लेकर दिए गए उनके संदेश को कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने अलग नजरिए से देखा था। हालांकि अब स्वयं सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी नेता को बधाई देना राजनीतिक निष्ठा बदलने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
शत्रुघ्न सिन्हा वर्तमान में पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने हालिया लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। फिल्म जगत से राजनीति में आए सिन्हा लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं और विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध भी रहे हैं।
इस बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में राज्यसभा स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी देखने को मिले हैं। हाल के दिनों में कुछ नेताओं के इस्तीफों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज किया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि संगठन मजबूत है और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।
शत्रुघ्न सिन्हा के ताजा बयान को तृणमूल कांग्रेस के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। उनके स्पष्ट रुख ने पार्टी के भीतर संभावित टूट या बड़े स्तर पर असंतोष की चर्चाओं को फिलहाल कमजोर कर दिया है। आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों और दलों की नजर बनी रहेगी।
