फीमेल पार्टनर से बहस के बाद कंक्रीट की सीढ़ियों पर मायूस बैठा दिखा 13 साल का गोरिल्ला
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिड़ियाघर के बाड़े में कियोमासा और उसकी मादा साथी के बीच किसी बात को लेकर जोरदार बहस हो गई थी। हालांकि, चिड़ियाघर के प्रबंधकों और अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों के बीच इस तरह के छोटे-मोटे मतभेद बेहद सामान्य हैं, लेकिन कियोमासा इस मामूली झगड़े को कुछ ज्यादा ही दिल पर ले बैठा। इस नोकझोंक के तुरंत बाद का जो नजारा कैमरे में कैद हुआ, उसने वैज्ञानिकों से लेकर आम जनता तक को अचंभित कर दिया है, क्योंकि गोरिल्ला का यह व्यवहार हूबहू किसी परेशान इंसान जैसा था।
विवाद शांत होने के बाद, कियोमासा अपनी मादा साथी से दूर पिंजरे में बनी कंक्रीट की सीढ़ियों पर जाकर बिल्कुल अकेला बैठ गया। करीब 62 सेकंड के इस वायरल क्लिप में साफ देखा जा सकता है कि वह किसी गहरे सदमे या आत्मचिंतन में डूबा हुआ है। सबसे मजेदार बात यह है कि उसने किसी दार्शनिक या गंभीर संकट में फंसे इंसान की तरह अपनी ठुड्डी पर हाथ रख रखा है। वह रह-रहकर अपना सिर खुजलाता है, अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ता है और शून्य में एकटक घूरने लगता है, जैसे वह अपनी जिंदगी के किसी बहुत बड़े और जटिल फैसले के बारे में विचार कर रहा हो।
कियोमासा के इस अद्भुत और इंसानी अंदाज को देखकर इंटरनेट जगत में मजेदार टिप्पणियों और मीम्स की बाढ़ आ गई है। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को विशेष रूप से शादीशुदा पुरुषों की वास्तविक पारिवारिक परिस्थितियों और उनके आपसी वैवाहिक विवादों से जोड़कर देख रहे हैं। कई यूजर्स ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी करते हुए लिखा कि यह गोरिल्ला निश्चित रूप से अपने दिमाग में उस पूरी लड़ाई को दोबारा रीप्ले कर रहा है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर उससे ऐसी क्या गलती हो गई, जिससे उसकी पार्टनर इतनी ज्यादा नाराज हो गई। कुछ लोगों ने तो कियोमासा की इस गहरी सोच को देखते हुए उसका नया नाम ‘गोरिलियो द फिलॉस्फर’ तक रख दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने जीव वैज्ञानिकों को भी एक बार फिर इस विषय पर सोचने के लिए प्रेरित किया है कि गोरिल्ला इंसानों के कितने करीब हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गोरिल्ला को इंसानों का सबसे नजदीकी रिश्तेदार माना जाता है और उनका लगभग 98 प्रतिशत डीएनए पूरी तरह से इंसानों से मेल खाता है। वे अत्यधिक संवेदनशील और सामाजिक प्राणी होते हैं, जो इंसानों की ही तरह क्रोध, ईर्ष्या, प्रेम, दुख, अवसाद और पछतावे जैसी जटिल मानसिक भावनाओं को गहराई से महसूस करने और उन्हें अपनी शारीरिक मुद्राओं के माध्यम से प्रदर्शित करने की क्षमता रखते हैं।
