August 11, 2026

कोर्ट में कथित फर्जीवाड़े के दो मामले उजागर, महिला डॉक्टर समेत दो आरोपियों पर एफआईआर

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मध्यप्रदेश। इंदौर में जिला न्यायालय से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने न्यायिक प्रक्रिया में दस्तावेजों की सत्यता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों मामलों में अदालत को कथित रूप से भ्रामक जानकारी और दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोप सामने आए हैं। न्यायालय के निर्देश पर एमजी रोड थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पहला मामला एक महिला डॉक्टर से जुड़ा है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी की जमानत के लिए ऐसी संपत्ति को आधार बनाया, जिसका विक्रय पहले ही किया जा चुका था। पुलिस के अनुसार शिकायत शासन की ओर से अली असलम अंसारी निवासी एमटीएच कम्पाउंड द्वारा दर्ज कराई गई है।

एफआईआर के मुताबिक डॉक्टर आसमा (30), निवासी मैजेस्टिक नगर, खजराना ने एक मामले में जमानतदार के रूप में अपनी संपत्ति के दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए थे। बाद में दस्तावेजों की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित संपत्ति पहले ही किसी अन्य व्यक्ति को बेची जा चुकी थी। आरोप है कि इसके बावजूद उसी संपत्ति को आधार बनाकर आरोपी गुलाब की जमानत लेने का प्रयास किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) इंदौर रवि कुमार साहू ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया। प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए 5 जून 2026 को संबंधित जमानतदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और दस्तावेजों की वैधानिक स्थिति की पड़ताल की जा रही है।

दूसरा मामला एक जब्त वाहन को छुड़ाने के प्रयास से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार आरोपी अनिल पुत्र सीताराम सिसोदिया, निवासी जगजीवनराम नगर ने स्वयं को वाहन से संबंधित अधिकार रखने वाला व्यक्ति बताते हुए न्यायालय में दस्तावेज प्रस्तुत किए। आरोप है कि उसने वाहन स्वामी शिवनारायण पुत्र शंकर सिंह गौर के नाम से दस्तावेज पेश कर सुपुर्दगी आदेश प्राप्त करने का प्रयास किया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने कथित रूप से वाहन मालिक के नाम से तैयार सुपुर्दगीनामा न्यायालय में जमा किया, जिस पर शिवनारायण के हस्ताक्षर दर्शाए गए थे। पहचान के लिए आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। हालांकि दस्तावेजों की जांच के दौरान कथित विसंगतियां सामने आने पर मामला उजागर हो गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों मामलों में दर्ज शिकायतों और न्यायालय के आदेश के आधार पर जांच की जा रही है। दस्तावेजों की सत्यता, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका तथा कथित फर्जीवाड़े के पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों की विश्वसनीयता न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे मामलों में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रामक जानकारी सामने आती है तो यह न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय माना जाता है। फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है और जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है।

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