पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट बनेंगे राज्यसभा सांसद, केवट-मल्लाह समाज को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व
ओरछा के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मोहल्ले में रहने वाले महेश केवट का राजनीतिक सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। वे वर्ष 2000 से 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहने वाले महेश के परिवार का धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से भी गहरा जुड़ाव है। उनके परिवार के सदस्य ओरछा के प्रसिद्ध फूलबाग स्थित लाला हरदौल बैठका की वर्षों से सेवा करते आ रहे हैं। उनके छोटे भाई आज भी नियमित रूप से यहां सेवा कार्य करते हैं। महेश स्वयं सीमेंट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।
महेश केवट का राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा। वर्ष 2022 के नगर परिषद चुनाव के दौरान स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए निष्कासन की कार्रवाई की थी। हालांकि बाद में जब मामले की जांच हुई तो प्रदेश स्तर पर उनके निष्कासन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद भाजपा संगठन ने वर्ष 2023 में औपचारिक रूप से निष्कासन समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने महेश के राजनीतिक कद को और अधिक चर्चा में ला दिया।
भाजपा संगठन में हाल ही में हुए बदलावों के बाद पार्टी ने ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई, जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हों लेकिन अब तक बड़े पदों पर न पहुंचे हों। इसी रणनीति के तहत सामाजिक रूप से प्रभावशाली लेकिन राजनीतिक रूप से अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व वाले केवट और निषाद समाज पर फोकस किया गया। महेश केवट को पहले मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया और अब उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने बड़ा सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महेश केवट का चयन केवल मध्य प्रदेश तक सीमित रणनीति नहीं है। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां निषाद, केवट और मल्लाह समाज की बड़ी राजनीतिक भूमिका है। ओरछा की भौगोलिक स्थिति झांसी और बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण महेश केवट भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में भी प्रभावी प्रचारक साबित हो सकते हैं।
मध्य प्रदेश में भी ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल और नर्मदा क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर केवट, मल्लाह, कहार, धीमर और निषाद समाज का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में भाजपा का यह दांव आगामी चुनावों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक छोटे नगर के जनप्रतिनिधि से लेकर राज्यसभा सांसद बनने की दहलीज तक पहुंचे महेश केवट की कहानी अब प्रदेश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व के उभार का बड़ा उदाहरण बनती नजर आ रही है।
