June 8, 2026

ईरान-इजरायल संघर्ष पर डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी, दोनों देशों से तुरंत गोलीबारी रोकने की अपील, तनाव और बढ़ा

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नई दिल्ली । मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों देशों से तत्काल गोलीबारी रोकने की अपील की है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान और इजरायल को तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकनी चाहिए और तनाव को और बढ़ने से रोकना चाहिए। उनका कहना था कि क्षेत्र में जारी संघर्ष वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, इसलिए तत्काल युद्धविराम आवश्यक है।

ईरान और इजरायल के बीच हालिया संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलों के दौरान कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। हमलों के बाद कई क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र भी अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी हमलों की पुष्टि की और इसे जवाबी कार्रवाई बताया। वहीं इजरायल की ओर से भी सैन्य प्रतिक्रिया जारी रही, जिसमें कई क्षेत्रों में तेज हमले किए गए। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

इजरायल ने अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा का हिस्सा बताते हुए कहा कि उसने लक्षित सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। वहीं ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला करार दिया है और कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व क्षेत्र में व्यापक अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है क्योंकि संघर्ष के विस्तार की आशंका से वैश्विक बाजार और कूटनीतिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की अपील की है।

ट्रंप की ओर से आया बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में हिंसा लगातार बढ़ रही है और किसी भी प्रकार की मध्यस्थता की कोशिशें अब तक सीमित सफलता ही हासिल कर पाई हैं। उनकी अपील को अमेरिका की संभावित भविष्य की विदेश नीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ेगा।

फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में क्या दोनों पक्ष बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या तनाव और बढ़ता है।

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