June 5, 2026

नितिन नवीन की मौजूदगी से बढ़ी अटकलें, क्या राज्यसभा जाएंगे रजनीश अग्रवाल?

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मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जिस नाम ने सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल पैदा की है, वह है रजनीश अग्रवाल। संगठन में वर्षों तक पर्दे के पीछे काम करने वाले रजनीश अग्रवाल को पार्टी ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा अब भी संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को शीर्ष स्तर तक पहुंचाने का दावा करती है।

पार्टी में उन्हें मजाकिया लेकिन सम्मानजनक अंदाज में ‘बूथ का भूत’ कहा जाता है। इसकी वजह है बूथ प्रबंधन में उनकी विशेषज्ञता और चुनावी मशीनरी को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका। राज्यसभा की इस दावेदारी के साथ उन्होंने कई बड़े और चर्चित नेताओं को पीछे छोड़ दिया है।

बूथ मैनेजमेंट के मास्टरमाइंड
साल 2021 से मध्य प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे रजनीश अग्रवाल ने प्रदेश के करीब 65 हजार बूथों के डिजिटाइजेशन का काम कराया। उनके नेतृत्व में बूथों को A, B, C और D श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया, जिससे चुनावी रणनीति को अधिक प्रभावी बनाया जा सका। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान 30 मतदाताओं पर एक अर्द्धपन्ना प्रभारी नियुक्त करने जैसी रणनीतियां भी उनकी टीम ने तैयार कीं। भाजपा के बढ़ते वोट शेयर और बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती में उनकी भूमिका को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया।

सवर्ण प्रतिनिधित्व के फॉर्मूले ने खोला रास्ता
मध्य प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के आठ सांसद हैं, लेकिन इनमें सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधि नहीं था। पार्टी नेतृत्व ने इस बार सामाजिक संतुलन साधने के लिए सवर्ण वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया। इसी रणनीति के तहत कई दिग्गज नेताओं के नामों पर चर्चा हुई। इनमें नरोत्तम मिश्रा, कैलाश विजयवर्गीय, अरविंद भदौरिया, अखंड प्रताप सिंह और मुन्नालाल गोयल जैसे नाम शामिल थे। हालांकि पार्टी ने यह तर्क स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में चुनाव लड़ चुके नेताओं के बजाय ऐसे कार्यकर्ता को अवसर दिया जाए, जिसने संगठन में लंबे समय तक काम किया हो और जिसे अब तक कोई बड़ा राजनीतिक पद न मिला हो। यही कारण रहा कि अंततः रजनीश अग्रवाल के नाम पर सहमति बन गई।

ABVP से शुरू हुआ सफर
सागर जिले के मंडीबामोरा कस्बे से आने वाले रजनीश अग्रवाल का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। पत्रकारिता के छात्र रहे अग्रवाल लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहे और बाद में भाजपा संगठन में आए। पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने संगठनात्मक काम में ऐसी पहचान बनाई कि वे पार्टी की चुनावी रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। भाजपा नेताओं के अनुसार, वे प्रचार से अधिक संगठन पर ध्यान देने वाले कार्यकर्ता माने जाते हैं।

वीडी शर्मा और शिवराज का मिला समर्थन
रजनीश अग्रवाल को प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी उस समय मिली थी जब वीडी शर्मा प्रदेश अध्यक्ष थे। वे शर्मा की टीम में प्रदेश मंत्री भी बने। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही राज्यसभा के लिए सवर्ण उम्मीदवार के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई, वीडी शर्मा ने रजनीश अग्रवाल का नाम प्रमुखता से आगे बढ़ाया। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने भी उन्हें उपयुक्त उम्मीदवार मानते हुए समर्थन दिया।

‘मैं टिकट मांगने भी नहीं गया’
राज्यसभा उम्मीदवार घोषित होने के बाद रजनीश अग्रवाल ने कहा कि यह केवल भाजपा में संभव है कि एक सामान्य कार्यकर्ता को राज्यसभा जैसे उच्च सदन तक पहुंचने का अवसर मिले। उन्होंने बताया कि वे संकोचवश मुख्यमंत्री मोहन यादव से टिकट की मांग करने तक नहीं गए। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया, जिसके लिए वे आभारी हैं।

शादी में शामिल होने पहुंचे थे नितिन नबीन
रजनीश अग्रवाल और नितिन नबीन का संबंध भारतीय जनता युवा मोर्चा के दिनों से है। अग्रवाल ने बताया कि जब वे युवा मोर्चा में प्रदेश महामंत्री थे, तब नितिन नबीन प्रदेश प्रभारी थे। उन्होंने याद करते हुए बताया कि 15 दिसंबर 2011 को अपनी शादी का निमंत्रण देते समय उन्होंने मजाक में कहा था कि घोड़ी पर उन्हें नितिन नबीन ही चढ़ाएंगे। नितिन नबीन ने वादा निभाया और शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।

तरुण चुग को भी मिला मौका
भाजपा ने दूसरी सीट पर तरुण चुग को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंजाब की राजनीति और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। वहीं कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है, जिन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता है।

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