June 4, 2026

परदे पर परफेक्ट शॉट के लिए जब पिता ने भुला दिया रिश्ता: 'गदर' के क्लाइमेक्स में अनिल शर्मा ने दांव पर लगा दी थी बेटे उत्कर्ष की जान

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नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनके दृश्य दर्शकों के जहन में हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं, लेकिन उन दृश्यों को परदे पर जीवंत करने के लिए पर्दे के पीछे जो खतरे उठाए जाते हैं, वे अक्सर हैरान करने वाले होते हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और खौफनाक किस्सा साल २००१ में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ के सेट से सामने आया है। फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा ने खुद इस बात का खुलासा किया है कि फिल्म के एक मुख्य और बेहद खतरनाक स्टंट सीन को फिल्माते समय उन्होंने निर्देशक के दायित्व को पूरा करने के लिए अपने ही सगे बेटे उत्कर्ष शर्मा की जान को दांव पर लगा दिया था। उत्कर्ष ने इस फिल्म में सनी देओल और अमीषा पटेल के बेटे ‘चरणजीत’ की भूमिका निभाई थी।

यह पूरा घटनाक्रम फिल्म के उस मशहूर क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग के दौरान का है, जिसमें मुख्य किरदार तारा सिंह अपने परिवार की रक्षा करते हुए पाकिस्तान से भारत की सीमा की तरफ भाग रहा होता है। इस पूरे दृश्य को किसी स्टूडियो में नहीं, बल्कि वास्तव में एक चलती हुई ट्रेन के ऊपर फिल्माया जा रहा था। सीन की मांग यह थी कि जब ट्रेन लगभग ४० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हो, तब अभिनेता सनी देओल अपने पांच वर्षीय बाल कलाकार बेटे उत्कर्ष शर्मा को अपने मजबूत कंधों पर बैठाकर ट्रेन की एक बोगी से दूसरी बोगी पर छलांग लगाएंगे। एक पिता होने के नाते अनिल शर्मा के लिए यह निर्णय बेहद आत्मघाती और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला था, परंतु फिल्म को वास्तविक और प्रभावशाली बनाने के चक्कर में उन्होंने यह बड़ा जोखिम मोल ले लिया।

शूटिंग के उन खौफनाक पलों को याद करते हुए अनिल शर्मा ने बताया कि जब यह शॉट चल रहा था, तब उनके भीतर का पिता इतना डर गया था कि उन्होंने डर के मारे अपनी आंखें पूरी तरह बंद कर ली थीं। उनके दिमाग में लगातार अनहोनी की आशंकाएं तैर रही थीं और वह सिर्फ भगवान से अपने बच्चे की सलामती की प्रार्थना कर रहे थे। जब तक ट्रेन के रुकने की आवाज उनके कानों में नहीं पड़ती थी, वह अपनी आंखें खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। निर्देशक ने इसे अपने पूरे फिल्मी सफर का सबसे मुश्किल और तनावपूर्ण शॉट करार दिया। उन्होंने आत्मग्लानि भरे स्वर में कहा कि आज भी जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, तो खुद से यही सवाल पूछते हैं कि यदि उस वक्त कोई छोटी सी चूक हो जाती या संतुलन बिगड़ जाता, तो क्या होता। उन्होंने माना कि सब कुछ सनी देओल के भरोसे छोड़कर उन्होंने बहुत बड़ा जुआ खेला था।

इस जानलेवा रिस्क और कलाकारों की कड़ी मेहनत का नतीजा यह हुआ कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। मात्र १८ करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी ‘गदर’ ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ७७ करोड़ रुपये और वैश्विक स्तर पर १३३ करोड़ रुपये की ऐतिहासिक कमाई की थी। इस फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके ५.६ करोड़ से अधिक टिकट बिके थे, जो भारतीय सिनेमा में एक रिकॉर्ड है। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के सिनेमाघरों में इस फिल्म को देखने के लिए ट्रकों में भरकर लोग आए थे। इसी ऐतिहासिक सफलता को दोहराने के लिए २२ साल बाद साल २०२३ में अनिल शर्मा इसका सीक्वल ‘गदर २’ लेकर आए, जिसमें अब बड़े हो चुके उत्कर्ष शर्मा मुख्य भूमिका में नजर आए और इस सीक्वल ने भी दुनिया भर में ६९१ करोड़ रुपये कमाकर इतिहास रच दिया, लेकिन इस सफलता की नींव में पिता का वो खौफनाक समझौता हमेशा छिपा रहेगा।

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