June 3, 2026

केरल हाईकोर्ट का फैसला: ‘वायरल गर्ल’ को बालिग माना, पति को एमपी में जमानत के लिए ट्रांजिट बेल

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नई दिल्ली । केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ‘वायरल गर्ल’ को प्रथम दृष्टया बालिग मानते हुए उसके पति को एक महीने की ट्रांजिट बेल प्रदान कर दी है। इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस अब अगले एक महीने तक आरोपी पति को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इस अवधि में उसे मध्य प्रदेश की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई है। यह मामला लगातार विवादों में घिरा हुआ है, जिसमें उम्र, शादी की वैधता और POCSO एक्ट के तहत दर्ज केस जैसे कई गंभीर पहलू शामिल हैं।

कोर्ट ने जन्म प्रमाण पत्र और दस्तावेजों को माना आधार
केरल हाईकोर्ट के जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद जन्म प्रमाण पत्र, वोटर आईडी और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि युवती बालिग है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि युवती स्वयं भी अपनी उम्र बालिग होने का दावा कर रही है और उसने विवाह को लेकर शपथपत्र भी दिया है। हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि जन्म प्रमाण पत्र फर्जी है और असल में युवती नाबालिग है। लेकिन कोर्ट ने फिलहाल इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

पति को मिली राहत, गिरफ्तारी पर रोक
अदालत ने आदेश दिया कि पति 3 जून से एक महीने के भीतर मध्य प्रदेश की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। इस अवधि के दौरान उसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इस फैसले को मामले में बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि मध्य प्रदेश पुलिस उस पर POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही थी।

शादी की वैधता और धर्म आधारित दलीलें भी बनीं विवाद का हिस्सा
याचिका में दंपती ने दावा किया कि यदि वे मध्य प्रदेश जाते हैं तो उन्हें अलग-अलग धर्मों के कारण संभावित खतरा हो सकता है और ‘ऑनर किलिंग’ की आशंका जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा के वे यात्रा या कानूनी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते।

वहीं सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों अलग-अलग धर्मों से हैं और मंदिर में हुई शादी की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

फिल्म शूटिंग से शुरू हुई थी कहानी

जानकारी के अनुसार, दोनों की मुलाकात केरल में एक फिल्म शूटिंग के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे संबंध बढ़े और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद मामला विवादों में तब आया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उम्र को लेकर आपत्ति जताई।

POCSO केस और जांच में बढ़ा विवाद
आयोग का दावा है कि शादी के समय युवती की उम्र 16 वर्ष थी और दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद मध्य प्रदेश के खरगोन में पति के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। वहीं जांच में जन्म प्रमाण पत्रों में विसंगतियां सामने आने और मेडिकल रिकॉर्ड में अलग जन्मतिथि दर्ज होने के बाद मामला और जटिल हो गया।

डायरेक्टर पर भी आरोप, अलग FIR दर्ज
इसी प्रकरण में युवती ने फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ भी POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि शूटिंग के दौरान उसका शोषण किया गया और फिल्म में अवसर देने के नाम पर उसे प्रभावित किया गया। निर्देशक ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और साजिश बताया है।

यह मामला अब कानूनी, सामाजिक और दस्तावेजी विवादों के बीच उलझता जा रहा है। एक ओर कोर्ट ने फिलहाल युवती को बालिग मानते हुए पति को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां दस्तावेजों और उम्र की सत्यता को लेकर जांच में जुटी हैं।

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