Uttarakhand samachar: उत्तराखंड में आतंकी नेटवर्क की साजिश का बड़ा खुलासा
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पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठन और ISI कर रहे कोशिश
Uttarakhand STF: सीमा पार पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठन और आईएसआई उत्तराखंड में सोशल मीडिया के जरिए आतंकी नेटवर्क तैयार करने की बड़ी साजिश का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। जांच में सामने आया है कि सीमा पार पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन और आईएसआई से जुड़े हैंडलर इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे थे। पिछले दो महीनों में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से चार संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद एजेंसियों ने निगरानी और जांच तेज कर दी है। खुलासे के बाद एसटीएफ उत्तराखंड ने इस पर निगरानी के लिए साइबर कमांडो तैनात किए हैं।
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि ये संदिग्ध पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों और विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिये युवाओं को प्रभावित करने और नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे थे। उत्तराखंड में आतंकवादी नेटवर्क खड़ा करने की साजिश का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
ऐसे हो रहा था संपर्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए संदिग्ध इंस्टाग्राम, वीडियो कॉल और अन्य सोशल मीडिया एप्लीकेशनों के जरिए विदेशी हैंडलरों से संपर्क में थे। डिजिटल जांच में ऐसे कई साक्ष्य मिले हैं जिनसे पाकिस्तान आधारित नेटवर्क से जुड़ाव की आशंका मजबूत हुई है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश की जा रही थी। सूत्रों के अनुसार, संदिग्धों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ सामग्री भेजी जाती थी और धीरे-धीरे उन्हें नेटवर्क का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जाता था। जांच में यह भी पता चला है कि कुछ युवाओं को तकनीकी कामों में शामिल करने की कोशिश की गई ताकि सीमा पार बैठे लोग संवेदनशील इलाकों की गतिविधियों पर नजर रख सकें।
गिरफ्तार किए गए आरोपी इंस्टाग्राम, वीडियो कॉल और अन्य सोशल मीडिया एप्लीकेशनों के माध्यम से सीमा पार बैठे आतंकियों और आईएसआई एजेंटों से संपर्क में थे। जांच एजेंसियों को ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं जिनसे पाकिस्तान से इनके जुड़ाव की आशंका मजबूत हुई है।
दीवारों पर लिखा गया तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) का नाम
देहरादून से गिरफ्तार एक संदिग्ध विक्रांत का नाम भी जांच में सामने आया है। आरोप है कि वह शहर की दीवारों पर “तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच)” लिखकर संगठन का प्रचार कर रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे और क्या किसी बड़े नेटवर्क की तैयारी चल रही थी। पूछताछ के दौरान शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट जैसे नाम भी सामने आए हैं। एजेंसियां इन कड़ियों को जोड़कर यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक पहुंचने का पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था।
इन राज्यों में एजेंसियां सतर्क
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सोशल मीडिया अब आतंक फैलाने और युवाओं को बरगलाने का सबसे बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। इसी वजह से उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में कई संदिग्ध युवाओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं यह नेटवर्क अन्य राज्यों तक तो नहीं फैला हुआ।
साइबर कमांडो की तैनाती, बढ़ाई गई निगरानी
आतंकी गतिविधियों के बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल को देखते हुए एसटीएफ उत्तराखंड ने विशेष साइबर कमांडो तैनात किए हैं। इनकी जिम्मेदारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों और विदेशी संपर्कों की निगरानी करना है। केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया के जरिए राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में तेजी आई है। आतंकी संगठन युवाओं को गुमराह कर उन्हें जिहाद जैसे अभियानों में शामिल करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि जांच में आईएसआई से जुड़े एक मॉड्यूल के संकेत मिले हैं, जो युवाओं को ऑनलाइन जोड़कर उन्हें अलग-अलग काम सौंप रहा था।
एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह का कहना है कि बीते कुछ समय में सोशल मीडिया में राष्ट्र विरोधी गतिविधियां बढ़ी हैं। आतंकी युवाओं को गुमराह करके तरह-तरह के जिहाद में शामिल करते हैं। जांच में आईएसआई का एक माड्यूल सामने आया है जो सोशल मीडिया में युवाओं को जोड़ रहा था। कई जगह उनसे सीसीटीवी इंस्टाल कराए ऐसी जगह से जहां से पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स आसानी से निगरानी कर सकें। सोशल मीडिया के माध्यम से ट्रांस बॉर्डर एक्टिविटी काफी बढ़ी है जिसे देखते हुए निगरानी के लिए साइबर कमांडो तैनात किए गए हैं।
