Uttarakhand samachar: शिक्षकों के तबादला एक्ट के तहत इस वर्ष नहीं होंगे अनिवार्य तबादले
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केवल अनुरोध के आधार पर निर्णय
उत्तराखंड में यह दूसरा साल है जब शिक्षकों के तबादला एक्ट के तहत अनिवार्य तबादले नहीं होंगे। शासन ने केवल अनुरोध के आधार पर तबादलों का निर्णय लिया है। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश को मुख्यमंत्री धामी का अनुमोदन मिल चुका है।
राज्य में इन दिनों तबादलों की प्रक्रिया चल रही है। तबादला एक्ट के मुताबिक अनुरोध के आधार पर तबादलों के लिए शिक्षकों एवं कर्मचारियों से 30 अप्रैल तक आवेदन मांग लिए जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक अनुरोध के आधार पर तबादलों के लिए आवेदन नहीं मांगे जा सके हैं। हालांकि तबादला एक्ट की धारा 27 के तहत कई शिक्षकों ने तबादलों के लिए आवेदन किए हैं।
जिन शिक्षकों ने इसके लिए आवेदन किए हैं, उनके तबादलों को लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। जबकि पिछले दिनों इसे लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है। सचिव कार्मिक शैलेश बगौली के मुताबिक शिक्षकों के इस साल दुर्गम से सुगम और सुगम से दुर्गम के आधार पर तबादले नहीं होंगे। प्रकरण के न्यायालय में विचाराधीन होने की वजह से इस आधार पर अनिवार्य तबादले नहीं किए जाएंगे। उनके अनुरोध के आधार पर तबादलों के लिए जल्द ही आदेश जारी कर दिया जाएगा।
तबादलों के लिए इस बार सीमा तय नहीं
प्रदेश में शिक्षकों, कर्मचारियों के तबादलों के लिए अब तक शासन की ओर से सीमा तय की जाती रही है। पूर्व में यह सीमा कभी 10 प्रतिशत तो कभी 15 प्रतिशत रही है लेकिन इस बार इसके लिए कोई सीमा तय नहीं है। सचिव कार्मिक विभाग शैलेश बगौली के मुताबिक पात्र कार्मिकों के खाली पदों पर अनिवार्य एवं अनुरोध के आधार पर तबादले किए जांएगे।
