भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मई में बढ़कर 55 पर, नए ऑर्डर और उत्पादन में तेज़ी से उद्योग गतिविधियों में मजबूती
रिपोर्ट के अनुसार मई का प्रदर्शन पिछले तीन महीनों में सबसे मजबूत माना जा रहा है, जो भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्थिर और व्यापक रिकवरी की ओर इशारा करता है। देश के कई हिस्सों, जिनमें मध्य प्रदेश सहित विभिन्न औद्योगिक केंद्र शामिल हैं, वहां भी उत्पादन गतिविधियों में सुधार का रुझान देखा गया है।
सर्वेक्षण के अनुसार इंटरमीडिएट और कैपिटल गुड्स सेगमेंट में वृद्धि उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की तुलना में अधिक तेज रही, जिससे औद्योगिक उत्पादन के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू मांग इस वृद्धि का मुख्य आधार बनी हुई है, जबकि निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर कुछ धीमी जरूर हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों से नए ऑर्डरों की लगातार प्राप्ति ने संतुलन बनाए रखा है।
एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कुछ देशों से भी भारतीय उत्पादों की मांग बनी हुई है, जिससे निर्यात आधारित गतिविधियों को समर्थन मिला है। लागत के मोर्चे पर कच्चे माल, ऊर्जा, ईंधन और परिवहन खर्चों में वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों की तुलना में अधिक है। यह वृद्धि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव का परिणाम मानी जा रही है।
हालांकि तैयार उत्पादों की कीमतों में वृद्धि की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है, जिससे कंपनियों के लाभ मार्जिन पर कुछ दबाव बनने की संभावना जताई जा रही है। उत्पादन और नए ऑर्डरों में आई तेज़ी फरवरी के बाद सबसे अधिक दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि उद्योगों में मांग का स्तर मजबूत बना हुआ है।
उद्योग जगत के अनुसार यह रुझान आने वाले महीनों में भी जारी रह सकता है, क्योंकि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश और निर्माण गतिविधियों में वृद्धि से औद्योगिक मांग को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों का विश्वास स्तर भी मजबूत बना हुआ है, जो उत्पादन क्षमता विस्तार और नई भर्तियों की संभावनाओं को बढ़ा रहा है।
हालांकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण लागत दबाव बना रह सकता है, लेकिन घरेलू मांग इस दबाव को काफी हद तक संतुलित कर रही है। कुल मिलाकर मई के पीएमआई आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत का विनिर्माण क्षेत्र स्थिर गति से विस्तार कर रहा है और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जिससे निवेश और उत्पादन दोनों को सकारात्मक दिशा मिल रही है।
