भारत के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एएमसीए की रफ्तार तेज, 30 महीने में पहला प्रोटोटाइप उड़ान के लिए तैयार करने का लक्ष्य
नई दिल्ली । भारत ने अपनी वायुसेना को आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए कार्यक्रम के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर दिया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी इस आरएफपी के साथ ही देश के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट के विकास की प्रक्रिया ने अब तेज रफ्तार पकड़ ली है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐसा आधुनिक लड़ाकू विमान तैयार करना है जो स्टील्थ तकनीक, अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और लंबी दूरी तक प्रभावी संचालन क्षमता से लैस हो।
आरएफपी के अनुसार बिडिंग प्रक्रिया 11 जून से शुरू होगी और 27 जुलाई को समाप्त होगी, जबकि 28 जुलाई को बोली खोली जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के तहत चयनित साझेदार को कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के मात्र 30 महीनों के भीतर पहले प्रोटोटाइप की उड़ान सुनिश्चित करनी होगी। परियोजना के तहत कुल पांच लो-ऑब्जर्वेबल प्रोटोटाइप विमान तैयार किए जाएंगे, जिससे परीक्षण और विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन भी बनाया जाएगा ताकि विमान की मजबूती और प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया जा सके।
इस पूरे विकास कार्य की जिम्मेदारी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी को सौंपी गई है, जो डिजाइन डेटा और तकनीकी ड्रॉइंग्स के आधार पर निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ इस परियोजना को आगे बढ़ाएगी। चयनित बोलीदाता को न केवल निर्माण कार्य करना होगा बल्कि फ्लाइट टेस्टिंग, टाइप सर्टिफिकेशन और तकनीकी मूल्यांकन में भी सहयोग देना होगा। विमान को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में उच्च स्तर की दक्षता और उत्तरजीविता क्षमता प्रदान कर सके।
एएमसीए परियोजना के लिए देश के तीन प्रमुख निजी क्षेत्र नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा भारत फोर्ज के साथ बीईएमएल जैसी कंपनियां शामिल हैं। यह मॉडल भारत में रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।
इस फाइटर जेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ तकनीक होगी, जिसके तहत इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह दुश्मन के रडार पर आसानी से दिखाई न दे। इसमें हथियारों और मिसाइलों को बाहरी हिस्सों की बजाय विमान के अंदरूनी कम्पार्टमेंट में रखा जाएगा, जिससे इसकी रडार क्रॉस सेक्शन क्षमता और कम हो जाएगी। यह विमान दो इंजन वाला मध्यम श्रेणी का लड़ाकू विमान होगा, जो लगभग 1.2 से 1.8 मैक की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होगा।
रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह प्रोजेक्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में भारतीय वायुसेना निर्धारित स्क्वाड्रन क्षमता से कम विमानों के साथ संचालन कर रही है। ऐसे में एएमसीए, तेजस के उन्नत संस्करणों के साथ मिलकर भविष्य में वायुसेना की ताकत को नई दिशा देगा। भारत पहले ही तेजस फाइटर जेट के जरिए स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को मजबूत कर चुका है और अब इस परियोजना के जरिए अगली पीढ़ी की लड़ाकू तकनीक में प्रवेश कर रहा है।
