May 27, 2026

रोबोटिक डॉग्स से लेकर देसी रामपुर हाउंड तक, सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 में दिखी युद्ध की नई तस्वीर

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नई दिल्ली । आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों और सैनिकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तकनीक और विशेष सैन्य प्रणालियां भी इसमें तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसी बदलते सैन्य परिदृश्य की झलक मेघालय के उमरोई में आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति 2026’ में देखने को मिली। इस बार अभ्यास में सिर्फ सैनिकों की रणनीति और सैन्य कौशल ही चर्चा में नहीं रहे, बल्कि भारतीय सेना के प्रशिक्षित K9 योद्धा और रोबोटिक डॉग्स भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने।

अभ्यास के दौरान सैन्य डॉग स्क्वॉड ने अपनी विशेष क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए मौजूद अधिकारियों और विदेशी प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा। इन प्रशिक्षित डॉग्स ने विस्फोटक खोजने, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने, लक्ष्य का पीछा करने और हमले जैसी कई सैन्य गतिविधियों को प्रदर्शित किया। सेना का मानना है कि आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में ऐसी टीमें सैनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सहायक शक्ति बनती जा रही हैं। कठिन परिस्थितियों में उनकी भूमिका कई बार अत्यंत निर्णायक साबित होती है।

इस अभ्यास में शामिल सैन्य डॉग्स की विशेष भूमिकाएं भी ध्यान आकर्षित करने वाली रहीं। इनमें एक हमला करने वाला प्रशिक्षित डॉग, एक ट्रैकिंग विशेषज्ञ और एक विस्फोटक खोजने वाला डॉग शामिल था। अलग-अलग परिस्थितियों में इनकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। सैन्य अधिकारियों के अनुसार युद्ध और सुरक्षा अभियानों में ऐसे प्रशिक्षित डॉग्स की मदद से जोखिम कम करने और अभियान को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलती है।

इस पूरे अभ्यास में सबसे अधिक चर्चा भारत की देसी नस्ल रामपुर हाउंड की रही। ‘विक्टर’ नाम का यह ट्रैकर डॉग अपनी फुर्ती और सूंघने की तेज क्षमता के कारण आकर्षण का केंद्र बना। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि भारतीय नस्लों में स्थानीय मौसम और कठिन परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता अधिक होती है। यही कारण है कि सेना अब स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारतीय सेना के K9 योद्धाओं की विशेषता यह है कि वे केवल सामान्य इलाकों तक सीमित नहीं रहते। इनका उपयोग रेगिस्तानी क्षेत्रों, घने जंगलों और बर्फीले इलाकों तक में किया जाता है। आतंकवाद विरोधी अभियान, विस्फोटक पदार्थों की खोज और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में इनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। सेना के अनुसार इनकी सबसे बड़ी ताकत तेज सूंघने की क्षमता, अनुशासन और अपने मिशन के प्रति विश्वसनीयता है।

अभ्यास में रोबोटिक डॉग्स की मौजूदगी ने भी भविष्य की युद्ध प्रणाली की एक नई तस्वीर पेश की। इनके प्रदर्शन के जरिए यह संकेत दिया गया कि आने वाले समय में तकनीक और पारंपरिक सैन्य कौशल एक-दूसरे के पूरक बनेंगे। सेना का मानना है कि भविष्य में रोबोटिक सिस्टम और K9 टीमें मिलकर सैन्य अभियानों को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और आधुनिक बना सकती हैं। प्रगति 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि युद्ध की नई दुनिया में तकनीक और प्रशिक्षण का यह मेल भविष्य की रणनीति तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

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